
सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सड़कों पर बैठने-घूमने वाले गोवंश के कारण बढ़ रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार जल्द ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करेगी। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने इसे तैयार कर लिया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही एसओपी लागू कर दी जाएगी।
दरअसल, बारिश के मौसम में आम जगह की अपेक्षा सड़कें जल्दी सूख जाती हैं, इससे गोवंश ज्यादातर सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिसके चलते सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसे देखते हुए एमपीआरडीसी ने मानक संचालन प्रक्रिया बनाई है।
इसके तहत प्रदेश में स्टेट हाईवे किनारे गोवंश के लिए टीन शेड का बाड़ा (गोशाला) का निर्माण कराया जाएगा। सड़क बनाने वाली कंपनी ही गोशाला बनाएगी। बेसहारा पशुओं को एकत्र कर यहां लाने की जिम्मेदारी भी कंपनी की ही होगी। नई सड़कों के निर्माण में जारी किए जाने वाले टेंडर की शर्तों में ये प्रविधान किए जाएंगे।
सड़क बनाने वाली संबंधित एजेंसी स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यह व्यवस्था करेगी। जिससे मध्य प्रदेश में स्टेट हाईवे भी गोवंश मुक्त किए जाएंगे। साथ ही सड़क किनारे चबूतरे भी बनाए जाएंगे, ताकि गोवंश सड़क की जगह इस पर बैठ सकें। हाईवे के प्रत्येक पांच किलोमीटर के दायरे में यह व्यवस्था होगी। इसके लिए एक बड़ा रेस्क्यू वाहन रखा जाएगा, जो गोवंश को सड़क से लाकर टीन शेड के बाड़े में छोड़ दे।
आए दिन दुर्घटना से गोवंश और वाहन में सवार लोगों की मृत्यु की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने यह व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री स्वयं भी गोवंश प्रेमी हैं और गोशालाओं में उन्हें अकसर गायों की सेवा करते देखा जा सकता है। सड़कों पर गोवंश के बैठने और तेज रफ्तार वाहनों द्वारा दुर्घटना का शिकार होकर मारे जाने को लेकर विधानसभा में भी हंगामा हो चुका है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही इस मुद्दे को सदन में उठाया था। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित तमाम वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों ने गोवंश के संरक्षण और उनकी सुरक्षा उपाय के लिए कई सुझाव दिए थे। कुछ सुझावों पर अमल करते हुए मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ने यह कवायद शुरू कर दी है।
सबसे अधिक समस्या नेशनल हाईवे पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) भोपाल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नवल का कहना है कि गोवंश के सड़कों पर बैठने और वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त होने की सबसे अधिक समस्या नेशनल हाईवे पर है। इसके लिए एनएचएआइ ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू दल बनाया है जो टोल नाका पर उपलब्ध काऊ कैचिंग व्हीकल की मदद से गोवंश को सड़क से रेस्क्यू कर नजदीक की गोशालाओं में छोड़ता है।
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60 किलोमीटर के दायरे में यह वाहन दिन में दो बार और रात में दो बार चक्कर लगाता है। रायसेन, नर्मदापुरम और गुना सहित अन्य जिलों में जिला प्रशासन ने सड़कों पर यह व्यवस्था शुरू कर दी है। गायों की गर्दन और सींग पर रेडियम लगाया जाता है ताकि वाहन चालक दूर से ही गायों को देख लें और वाहन धीमा कर सकें।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की पहले से एसओपी लागू है। हम अपनी नई सड़कों पर गोवंश प्रबंधन के लिए एसओपी बना रहे हैं, जिसमें प्रयोग के तौर पर कुछ नई सड़कों के किनारे गोशालाएं बनाई जाएंगी। टेंडर की शर्तों में इसके प्रविधान कर रहे हैं। परिणामों के आधार पर आगे कार्रवाई करेंगे।- भरत यादव, प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम।