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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नोएडा की त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बहुचर्चित मामला शुरुआती जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के गंभीर आरोपों के बाद अब राज्य पुलिस से निकलकर केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के हवाले होने जा रहा है। सोमवार को भोपाल पुलिस की एसआईटी ने दिनभर केस से जुड़े दस्तावेज, बयान, मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों को व्यवस्थित कर केस डायरी तैयार की।
देर रात तक चली कार्रवाई के बीच यह भी जानकारी सामने आई कि दिल्ली से सीबीआई की टीम भोपाल पहुंच चुकी है और मंगलवार को औपचारिक रूप से केस टेकओवर कर सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केस से जुड़ा हर तकनीकी और दस्तावेजी पहलू व्यवस्थित किया गया है, ताकि सीबीआई को जांच में किसी तरह की परेशानी न हो।
सोमवार रात करीब आठ बजे एसआईटी त्विषा के आरोपित पति समर्थ सिंह को लेकर कटारा हिल्स में बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित उसके घर पहुंची। यहां पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का स्पॉट वेरिफिकेशन कराया। समर्थ से उसी क्रम में घटना दोहराने को कहा गया, जैसा उसने पूछताछ में बताया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, समर्थ ने बताया कि वह त्विषा को खोजते हुए छत तक पहुंचा था। वहां से उसने अपने मौसेरे भाई और नौकर की मदद से शव नीचे उतारा। इसके बाद सीढ़ियों पर उसे सीपीआर देने की कोशिश की गई। पुलिस ने करीब आधे घंटे तक पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रिक्रिएट कराया।
रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात एसआईटी ने त्विषा की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से घर जाकर पूछताछ की। शादी के बाद के हालात, पारिवारिक विवाद और त्विषा के साथ संबंधों को लेकर लंबी पूछताछ की। अब जांच एजेंसी मां-बेटे के बयानों का तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है। भोपाल के पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि पहले चरण की पूछताछ पूरी कर ली गई है। जरूरत पड़ने पर दूसरे चरण की पूछताछ भी की जाएगी।
रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की भोपाल जिला न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत को निरस्त करवाने के लिए दायर दो याचिकाओं पर सोमवार को जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। गिरिबाला की ओर से इस मामले में जवाब देने के लिए समय मांगा गया। इस पर न्यायमूर्ति देवनारायण की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 मई को दोपहर 2.30 बजे तय कर दी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के पूर्व जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि त्विषा के स्वजन की ओर से दायर पहली याचिका में गिरिबाला की अग्रिम जमानत को इस तर्क के साथ निरस्त करने की मांग की गई है कि वह बाहर रहकर साक्ष्यों से छेड़छाड़ करा सकती हैं। वहीं, राज्य शासन की ओर से भी यह कहते हुए याचिका दायर की गई है कि गिरिबाला जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। कोर्ट को महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि गिरिबाला सिंह को नोटिस की तामिली नहीं हुई थी, इसलिए उनकी ओर से समय मांगा गया था।
इस बीच, महाधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी जबलपुर से शामिल हुए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कहा गया है कि अब इस मामले में कोई भी पक्ष मीडिया में अपना बयान नहीं देगा। जो भी बात रखनी है, उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखनी होगी। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।