• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • ए आई बूटकैंप
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP UCC Bill: शादी के एक साल बाद ही तलाक पर हो सकेगा विचार, सिमटेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ का दायरा, बेटियों को मिलेगा समान हक

मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को मानसून सत्र के पहले ही दिन समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 प्रस्तुत कर दिया गया है। इस विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 08:53:03 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 07:26:27 AM (IST)
MP UCC Bill: शादी के एक साल बाद ही तलाक पर हो सकेगा विचार, सिमटेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ का दायरा, बेटियों को मिलेगा समान हक
मप्र विधानसभा में मंत्री गौतम टेटवाल ने रखा बिल। (AI Generated)

HighLights

  1. एमपी विधानसभा में यूसीसी बिल 2026 हुआ पेश
  2. मप्र विधानसभा में मंत्री गौतम टेटवाल ने रखा बिल
  3. विधानसभा में पहले ही दिन कांग्रेस का भारी हंगामा

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को मानसून सत्र के पहले ही दिन समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 प्रस्तुत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने इसे सदन के पटल पर रखा। इस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस ने बिल को पूरक कार्यसूची के जरिए अचानक लाने पर आपत्ति जताते हुए भारी हंगामा किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, इस विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा की जाएगी।

मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश समान नागरिक संहिता विधेयक मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों (मुस्लिम पर्सनल लॉ) को बुनियादी तौर पर बदल देगा। इसके तहत मुख्य रूप से चार बड़े क्षेत्रों में सीधे बदलाव आएंगे।

1. विवाह और तलाक

बहुविवाह (चार शादियां) और निकाह हलाला पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। शादी के लिए लड़कियों की उम्र अनिवार्य रूप से 18 वर्ष होगी और तलाक केवल अदालत के माध्यम से ही संभव होगा। विवाह के एक वर्ष बाद ही विवाह विच्छेद की अर्जी पर विचार हो सकेगा।


2. उत्तराधिकार और वसीयत

मुस्लिम पर्सनल लॉ की एक-तिहाई संपत्ति वसीयत करने की सीमा समाप्त हो जाएगी, जिससे मुस्लिम नागरिक अपनी शत-प्रतिशत संपत्ति किसी को भी वसीयत कर सकेंगे। बिना वसीयत की संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर हक मिलेगा।

3. भरण-पोषण और संरक्षण

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को इद्दत (तलाक या पति की मृत्यु के बाद बिताने वाली अवधि) की अवधि के बाद भी आजीवन (या दूसरी शादी होने तक) गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार होगा।

4. बच्चा गोद लेना

मुस्लिम परिवारों को अन्य नागरिकों की तरह कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने का अधिकार और प्रक्रियागत मान्यता मिलेगी।

अनुसूचित जनजातियां यूसीसी से बाहर

यूसीसी के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना होगा। ऐसा न करने पर तीन महीने की जेल या 10 हजार जुर्माने का प्रावधान है। लिव इन पंजीयन उसी सूरत में नहीं होगा, जहां कम से कम एक व्यक्ति विवाहित हो, पहले से ही लिव इन संबंध में हो, एक अवयस्क हो या जहां गलत पहचान बताई गई हो।

जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या एआरटी के जरिए जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी हक मिलेगा। अवैध संतान जैसे शब्दों को समाप्त किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आने वाली भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया जैसी अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

पैतृक संपत्ति में मिलेगा बराबरी का हक

पैतृक संपत्ति में अब तक मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले आधा हिस्सा मिलता है, यूसीसी में इसकी जगह बेटियों को बेटों के बराबर संपत्ति का अधिकार मिलेगा और पत्नी को भी पति की संपत्ति में उचित हिस्सा मिलेगा।

पूरी संपत्ति की वसीयत का अधिकार मिलेगा

वसीयत से जुड़े प्रावधान में संपत्ति हस्तांतरण की पूरी आजादी होगी। नए कानून के तहत कोई भी व्यक्ति (चाहे वह किसी भी धर्म का हो) अपनी पूरी संपत्ति किसी को भी वसीयत के जरिए दे सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ में वर्तमान में कोई भी व्यक्ति अपनी कुल संपत्ति के केवल एक-तिहाई हिस्से की ही वसीयत कर सकता है। यूसीसी लागू होने के बाद यह सीमा समाप्त हो जाएगी।

यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत किए मर जाता है, तो संपत्ति में बेटियों और बेटों को बिल्कुल बराबर का हिस्सा मिलेगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ का वह नियम खत्म हो जाएगा जिसके तहत महिलाओं को पुरुषों से आधा हिस्सा मिलता था।

यह भी पढ़ें- इंदौर में किसानों का उग्र प्रदर्शन, भोपाल कूच से पहले पुलिस ने रोका, छोड़े आंसू गैस के गोले; पश्चिम रिंग रोड पर मुआवजे की मांग

18 वर्ष से कम आयु में विवाह गैरकानूनी होगा

  • विवाह के लिए पुरुष की आयु 21 और स्त्री के लिए 18 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम आयु में विवाह गैरकानूनी होगा।
  • यह प्रावधान सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होंगे। विवाह किसी भी पद्धति से हो, वह प्रावधान के दायरे में रहता है तो मान्य होगा।
  • विवाह के समय जीवित पत्नी या पति नहीं होना चाहिए, तभी कानूनी तौर पर मान्य होगा।
  • विवाह का पंजीयन सबको कराना होगा, भले ही विवाह कहीं भी हुआ हो। आवेदन 60 दिन के भीतर करना होगा।
  • कोई भी विवाह केवल पंजीयन नहीं कराने, प्रमाण पत्र जारी नहीं होने या उसमें असत्य विवरण के कारण अविधिमान्य नहीं होगा।
  • रजिस्ट्रार विवाह या विवाह विच्छेद के पंजीयन को निरस्त कर देता है तो उसकी अपील रजिस्ट्रार जनरल या सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के सामने तीस दिन के भीतर की जा सकेगी और उसका निर्णय अंतिम होगा।
  • विवाह के लिए सहमति बलपूर्वक या कपट से प्राप्त करने, विवाह के समय पत्नी का किसी अन्य पुरुष से गर्भवती होने या पति द्वारा किसी अन्य महिला के गर्भवती होने और पहचान छुपाने की स्थिति में विवाह शून्य किया जा सकेगा।
  • विवाह विच्छेद क्रूरता का व्यवहार, दो वर्ष की निरंतर कल अवधि तक छोड़कर रखने, मतांतरण, भरण पोषण में विफल रहने के आधार पर हो सकता है।
  • विवाह का विघटन केवल संहिता के प्रावधान के अनुसार ही हो सकता है अन्य किसी प्रकार से नहीं। इसका उल्लंघन करने पर तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ में नजदीकी रक्त संबंध में विवाह की अनुमति थी, जो अब नहीं रहेगी। इसमें पुत्र की विधवा, पुत्री की पुत्री की पुत्री, भाई की पुत्री, बहिन की पुत्री सहित अन्य शामिल हैं।