
शशिकांत तिवारी, नईदुनिया, भोपाल। भाजपा ने घोषणा पत्र में जो वादे किए थे, उन्हें दो वर्ष में भी पूरा नहीं कर पाई है। अगर प्रदेश आत्मनिर्भर और सक्षम हो रहा है तो कर्ज की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश की जनता को वर्ष 2047 के सपने दिखाने की जगह आज सरकार क्या कर रही है। क्या सरकार ने रियायतें दीं?
कागजों में योजना बना ली जाती है, पर उसके लिए बजट रखा नहीं जाता। जब बजट ही नहीं रहेगा तो क्या होगा। जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी, इस आधार पर सरकार बजट रखेगी तो धरातल पर योजनाएं दिखेंगी। यह बात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 'नईदुनिया' से विशेष बातचीत में कही।
आप कहते हैं वर्तमान सरकार विफल है, लेकिन भाजपा पूछती है कि 15 महीने में कांग्रेस ने क्या बदल दिया? तो उमंग सिंघार ने कहा, कांग्रेस की सरकार आई थी तो किसानों की कर्जमाफी का वादा तुरंत पूरा किया था। उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में कम बैठकों की वजह से विपक्ष को जनता की आवाज उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। हमारी, पहली कोशिश यही है कि बैठकों की संख्या बढ़ाई जाए। सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचना चाहती है।
हमारी आवाज दबाकर विपक्ष ही नहीं, जनता की आवाज दबाना चाहती है सरकार : उमंग सिंघार
सरकार विपक्ष नहीं, जनता की आवाज दबाना चाहती है। इस कारण चर्चा से बचती रहती है। भागीरथपुरा जैसे महत्वपूर्ण मामले में स्थगन पर चर्चा नहीं कराई गई। हालांकि, हमारी पूरी कोशिश रहती है कि प्रदेश के सभी महत्वपूर्ण विषयों को सदन में अलग-अलग तरीके से उठाया जाए। सदस्यों के बीच संवाद और समन्वय को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे कोई विषय छूटे नहीं और दोहराव भी न हो। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ‘नईदुनिया’ से विशेष चर्चा में ये बातें कहीं।
विपक्ष जनता की आवाज होता है। क्या आपको लगता है कांग्रेस पूरी ताकत से जनता की आवाज उठा पा रही है?
हम जनता की आवाज पूरी मजबूती के साथ उठा रहे हैं। यही नहीं पिछले सत्रों में भी विपक्ष ने सभी प्रमुख मुद्दों को सदन में विभिन्न तरीके से उठाया है। इस सत्र में भी चाहे भागीरथपुरा का मामला हो या फिर कफ सीरप का, गरीबी, बेरोजगारी और सरकार पर बढ़ते कर्ज का। ऐसे सभी विषयों को हमने उठाया है। वर्ष में 50 से 60 बैठकें होनी चाहिए, लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में सबसे छोटा सत्र मध्य प्रदेश विधानसभा का होता था। हमारे प्रयास से बैठकों की संख्या बढ़ी है।
हाल ही में विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अमर्यादित शब्दों का उपयोग हुआ। लोकतंत्र के मंदिर में ऐसा होना चाहिए क्या?
लोकतंत्र के मंदिर में ऐसा बिलकुल भी नहीं होना चाहिए। सरकार चर्चा नहीं कराना चाहती है और वह भी डरा कर। वह विपक्ष को नहीं प्रदेश की जनता को डराना चाहती है। उसकी आवाज बंद करना चाहती है। यह प्रदेश की जनता का अपमान है।
वर्तमान विधानसभा सत्र के बचे हुए दिनों का उपयोग किस तरह से करने की योजना है?
निश्चित तौर पर प्रदेश के लिए क्या सकारात्मक हो सकता है, प्रदेश के मुद्दों को लेकर हम जनता की आवाज बुलंद करेंगे। इसके लिए सदस्यों के साथ बैठकर रणनीति बनाएंगे। सदन के एक-एक मिनट का सदुपयोग जनता के हित में करेंगे। आगे कौन से मुद्दे उठाएंगे यह अभी बताना उचित नहीं होगा, लेकिन हमारी पूरी तैयारी है कि जनता से जुड़े प्रश्नों का सरकार से जवाब लिया जाए।
क्या आपको लगता है कि सरकार सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है?
बिलकुल, सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से बचती है और झूठे आंकड़े गिनाती है। इसी कारण स्थगन को स्वीकार नहीं किया, इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है। सरकार नहीं चाहती कि उसकी कमजोरी सामने आए। इसके पहले भी ऐसे कई मुद्दों पर सरकार बचती नजर आई है। जनता टैक्स दे रही है, लेकिन उसे पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
सदन में विपक्ष की भूमिका को आप किस तरह प्रभावी बनाना चाहेंगे?
विधायकों को प्रशिक्षण देना और उन्हें प्रदेश के बड़े मुद्दों से अवगत कराना, इस पर पूरा ध्यान दिया जाता है। जनता की आवाज विपक्ष किस तरह से प्रभावी तरीके से सदन में उठा सके, इसमें लगातार कुछ न कुछ नया करने की कोशिश की जाती है। संवाद और समन्वय पर सबसे अधिक जोर रहता है। उठाए जाने वाले मुद्दे तथ्यपरक हों, यह बड़ी कोशिश रहती है। यही कारण है कि पूरे प्रमाण के साथ विपक्ष अपना विषय रखता है।
क्या आपको लगता है कि विपक्ष की आवाज़ को पर्याप्त समय और महत्व मिल रहा है?
विपक्ष की बात सुनने के लिए सरकार के पास समय नहीं है। वह सिर्फ अपना बिजनेस कराना चाहती है। सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए समय नहीं देना चाहती। ध्यानाकर्षण और लोक महत्व के विषय विधायकों ने लगाए उन पर जवाब नहीं देना चाहती।
नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
कांग्रेस के प्रति प्रदेश की जनता में विश्वास पैदा हो। सदन को कैसे चलाना, जनता के अधिकारों की बात करना चुनौती थी। मैं समझता हूं पिछले दो वर्ष में विपक्ष के रूप में हमारी भूमिका को जनता ने अच्छी तरह से महसूस किया है। भरोसा किया है। आगे भी यही कोशिश रहेगी की जनता के विश्वास पर हम खरे उतरें।
विधानसभा में विपक्ष की तरफ से कई बार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जगह अति स्थानीय प्रश्न पूछे जाते हैं?
ऐसा नहीं है। विधायकों को जनता की समस्याओं के प्रति सजग रहना चाहिए। पार्टी में चर्चा होती है। उसी से हम प्रदेश स्तरीय मुद्दे सभी की सहमति से तय करते हैं। विधायक को अपने क्षेत्र की बातें तो उठानी ही चाहिए। प्रदेश स्तरीय विषय उठाने के पहले हम शोध, अध्ययन और चर्चा करते हैं। सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश के धार-मंडला में सूरज ने दिखाए अपने तेवर, इन जिलों में बारिश का अलर्ट