
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पर्यटन (Rural Tourism) अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों की आजीविका का मजबूत जरिया बन चुका है। राज्य के 98 गांवों में सैलानियों को बैलगाड़ी की सैर कराने, गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेल खिलाने और देहाती जीवन का असली अनुभव कराने से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। केवल चालू वित्तीय वर्ष में होम-स्टे संचालकों ने सीधे तौर पर 6.76 करोड़ रुपये की कमाई की है।
गांवों में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पारंपरिक खान-पान और लोक संस्कृति का सहारा लिया जा रहा है। मेहमानों को कोदो-कुटकी की खीर, महुआ से बने पकवान और ज्वार-बाजरे की गरमा-गरम रोटियां परोसी जा रही हैं। खेतों में पैदल सैर, गाय का दूध दुहना और 'सैताम' व 'गैंडी' जैसे स्थानीय लोक-नृत्य सैलानियों को भारत की जड़ों से जोड़ रहे हैं।
प्रदेश के पंजीकृत 447 होम-स्टे में से 307 वर्तमान में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जहां अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटक रुक चुके हैं। सरकार 1,000 नए होम-स्टे विकसित करने और 100 नए गांवों को इस नेटवर्क में जोड़ने पर काम कर रही है। अनूपपुर, डिंडोरी और मंडला के 14 जनजातीय बाहुल्य गांवों में ट्राइबल फंड की मदद से 84 नए होम-स्टे बनाए जाएंगे। उज्जैन (95), भोपाल (82), ओरछा (36), कान्हा (35) और इंदौर (34) जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे सेवाएं पहले से चालू हैं।
नागपुर हाईवे के पास स्थित इस गांव के 'ताप्ती विहार होम-स्टे' के संचालक गणेश उइके को डेढ़ साल में 2 लाख का मुनाफा हुआ। यहां दुबई के मेहमानों सहित 500 से अधिक परिवार रुक चुके हैं। यह गांव 'मॉडल टूरिज्म विलेज' के रूप में उभरा है, जहां 209 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि ग्रामीण आजीविका का अध्ययन करने पहुंचे हैं। चिमटीपुर के 'आंकला होम-स्टे' ने 3 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है, जहां कनाडा और फ्रांस से पर्यटक पहुंचे हैं।
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पर्यटन बोर्ड के पोर्टल पर अब कोई भी ग्रामीण या फार्म हाउस मालिक मुफ़्त में रजिस्ट्रेशन करा सकता है। प्राकृतिक स्थलों, जंगलों और खेतों के करीब स्थित संपत्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है। 65 गांवों में सोलर लाइटें लग चुकी हैं और अगले एक साल में सभी होम-स्टे वाले गांवों को सौर ऊर्जा से कवर करने का लक्ष्य है। ग्रामीणों को आतिथ्य, गाइड सेवा और ऑनलाइन मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि पर्यटक 'मेक माई ट्रिप' जैसे प्लेटफॉर्म से सीधे बुकिंग कर सकें।