
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन के लिए कर्मचारी चयन मंडल (व्यापम) द्वारा वर्ष 2022 में 137 करोड़ तथा 2023 में 160 करोड़ रुपये शिक्षा विभाग को दिए गए। इस तरह एक करोड़ बेरोजगारों से वसूले 297 करोड़ शिक्षा विभाग को दिए गए। उक्त जानकारी मप्र विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 29 जुलाई 2025 को दिए उत्तर में व्यापम द्वारा शिक्षा विभाग को दी गई राशि क्रमशः 137 करोड़ तथा 297 करोड़ बताई थी तथा दोनों राशि के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लिखे पत्र के क्रमांक भी दिए थे, यह समझ से परे है कि 297 की राशि घटकर 160 करोड़ कैसे हो गई।
ग्रेवाल ने कहा कि 297 करोड़ रुपये लगभग एक करोड़ बेरोजगारों से वसूली गई फीस है, इसमें राशि को शिक्षा विभाग को देना समझ से परे है। जबकि दो वर्ष की 2022 तथा 2023 को मिलाकर शिक्षा विभाग का बजट 59,778.47 करोड़ है।
व्यापम ने वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट में 137 करोड़ को परीक्षा केंद्र पर खर्च का समन्वय तथा 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट में 160 करोड़ को नकद राशि में विलोपित बताकर हस्तांतरित किया, जो कि वित्तीय नियमों के विपरीत है। पूछने पर एक करोड़ बेरोजगारों से वसूले 297 करोड़ शिक्षा विभाग को देने का तथ्यात्मक कारण नहीं बताया।
ग्रेवाल ने कहा कि व्यापम के पास 2021-22 में फिक्स डिपॉजिट तथा नकद जमा मिलाकर 675 करोड़ थे, जो 2024-25 में घटकर 386 करोड़ हो गए। 2020 से जून 2026 तक 73 परीक्षाओं का आयोजन किया, जिसमें से 40 भर्ती परीक्षा तथा शेष चयन तथा प्रवेश परीक्षा हैं। नौ भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित नहीं किए गए तथा 31 परीक्षा मिलाकर 51,230 का चयन किया गया।
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73 परीक्षा के लिए लगभग 2.27 करोड़ ने आवेदन किया तथा 65 परीक्षाओं में 78.33 लाख शामिल हुए। आठ परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी की संख्या नहीं बताई गई। व्यापम को 2020-21 से 2024-25 तक शुल्क के रूप में 359.50 करोड़ प्राप्त हुए। इस अवधि में आयोजित 12 से अधिक परीक्षा में फर्जीवाड़े को लेकर प्रकरण दर्ज हुए।