धूप होने के बाद भी नहीं बनी परछाई! भोपाल के अटल पार्क में बच्चों ने देखा सूरज का अद्भुत कमाल
भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित अटल पार्क में नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने जीरो शैडो डे के अवसर पर एक विशेष वैज्ञानिक जागरूकता ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 13 Jun 2026 09:30:52 PM (IST)Updated Date: Sat, 13 Jun 2026 09:30:52 PM (IST)
अटल पार्क में बच्चों ने देखा सूरज का अद्भुत कमाल। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)HighLights
- अटल पार्क में बच्चों ने देखा सूरज का कमाल
- साल में दो बार होती है यह अनोखी घटना
- अटल पार्क में ऐसे किया गया अनोखा प्रयोग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अरेरा हिल्स स्थित अटल पार्क में नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने जीरो शैडो डे के अवसर पर एक विशेष वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही घड़ी में दोपहर के 12 बजकर 20 मिनट हुए वैसे ही पार्क के प्लेटफॉर्म पर रखे बेलनाकार पाइप, बोतलें और खड़े लोगों की परछाईं पूरी तरह से गायब हो गई। कुछ मिनटों के लिए अपनी ही परछाई को खुद के पैरों के नीचे सिमटते देखना रोमांचक था।
साल में दो बार होती है यह अनोखी घटना
सारिका ने बताया कि पृथ्वी के झुकाव के कारण सूर्य की किरणें कर्क और मकर रेखा के बीच रहने वाले स्थानों पर ही साल में दो बार ठीक सीधी पड़ती हैं। साउथ भोपाल में यह घटना उत्तरायण सूर्य के कारण पहली बार 13 जून को होती है। कर्क रेखा से वापस आते दक्षिणायन सूर्य के कारण यह दोबारा 28 जून को भी होती है, लेकिन तब मानसून सक्रिय होने के कारण दिखने की संभावना कम रहती है।
सारिका ने बताया कि मौसम या किसी अन्य कारण से अगर शनिवार को आप इस घटना को देखने से चूक गए हैं तो निराश मत होइए। रविवार दोपहर में इस घटना को मामूली अंतर के साथ लगभग इसी रूप में देखा जा सकता है। याद रखिए सूर्य अपनी यात्रा के अंतिम चरण में 21 जून को कर्क रेखा पर स्थित नगरों में पहुंचेगा।
अटल पार्क में ऐसे किया गया अनोखा प्रयोग
ऐसे किया प्रयोग - एक सफेद कागज पर चार कप सपोर्ट के लिए उल्टे रखे गए। पारदर्शी कांच प्लेट इन कप पर रखी गई। इसके ऊपर एक खोखले पाइप को वर्टिकल रखा गया। दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर कुछ देर के लिए सूर्य की किरणें प्लास्टिक पाइप के बिल्कुल आर-पार निकल गईं और नीचे रखे कागज पर चमकती डिस्क दिखाई दी। इस समय पाइप की कोई परछाई नहीं बनी।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था, क्योंकि खेल-खेल में सीखी गई विज्ञान की बातें दिमाग पर गहरी छाप छोड़ती हैं।