
नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे जिले के केला उत्पादक किसानों को अब तक सरकार और प्रशासन से आश्वासन तो मिलता आ रहा है, लेकिन मुआवजा राशि अब भी नहीं मिल पाई है। जिसके कारण कई किसान न तो बैंकों का कर्ज वापस कर पा रहे हैं और न ही अगली फसल की तैयारी कर पाए हैं। कुछ छोटे किसानों ने साहूकारों से कर्ज भी ले लिया है।
ज्ञात हो कि इस साल तीन बार तेज हवा और बेमौसम वर्षा के कारण 189 गांवों में केला फसल को नुकसान हुआ है। इन गांवों के 7501 किसानों की 8393.69 हेक्टेयर में लगी फसल खराब हुई थी। जिला प्रशासन के सर्वे में 98.96 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया था। इनमें बुरहानपुर नगर तहसील के 25 गांव, ग्रामीण के 59, नेपानगर के 54 और खकनार तहसील के 51 गांव शामिल थे। इसके अनुरूप प्रशासन ने प्रस्ताव बना कर भोपाल भेजे थे। प्रस्ताव भेजे हुए करीब डेढ़ माह हो चुके हैं, लेकिन अब तक मुआवजा राशि का वितरण शुरू नहीं हो पाया है।
जिले के किसान सरकारी सिस्टम की लापरवाही का शिकार हैं। एक ओर उन्हें मुआवजा देने में कई महीने का इंतजार कराया जाता है तो दूसरी ओर सरकार फसल बीमा का लाभ भी नहीं दे पा रही है। बीते सात साल से किसान मौसम आधारित फसल बीमा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रगतिशील किसान संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ पाटथ्ल का आरोप है कि जन प्रतिनिधि हर बार फसल बर्बाद होने पर खेतों में दिलासा देने तो पहुंचते हैं, लेकिन फसल बीमा का लाभ नहीं दिला पा रहे। उनका कहना है कि आरबीसी के तहत अधिकतम दो लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है, जो नुकसान के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। हर साल नुकसान के कारण किसानों की लगातार कमर टूट रही है।
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केला फसल खराब हो जाने के कारण कई छोटे किसान इन दिनों खाद और बीज के संकट से भी जूझ रहे हैं। उनके पास इसके लिए भी रुपये नहीं बचे हैं। जिसके कारण वे कहीं से भी कर्ज लेने के लिए विवश हैं। इसके अलावा खाद के लिए टोकन प्रणाली लागू होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
हालांकि कलेक्टर हर्ष सिंह ने सख्त निर्देश दिए हैं, कि इस तरह की शिकायत मिलने पर संबंधित दुकानदार अथवा समिति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।