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एमपी में रेलवे की लापरवाही से 20 हजार लोग परेशान, बुरहानपुर का लालबाग ओवरब्रिज 13 साल बाद भी अधूरा, अब PMO पहुंचा मामला

बुरहानपुर के उप नगरीय क्षेत्र लालबाग से चिंचाला को जोड़ने के लिए करीब 13 साल पहले शुरू किया गया रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अब भी अधूरा पड़ा है।

By Sandeep ParohaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 05 Jul 2026 05:20:13 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Jul 2026 05:20:13 PM (IST)
एमपी में रेलवे की लापरवाही से 20 हजार लोग परेशान, बुरहानपुर का लालबाग ओवरब्रिज 13 साल बाद भी अधूरा, अब PMO पहुंचा मामला
अधूरा पड़ा लालबाग रेलवे ओवरब्रिज। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. रेलवे की लापरवाही से 20 हजार आबादी परेशान
  2. सेतु निगम ने 6 साल पहले बनाया अपना हिस्सा
  3. भिलाई से गर्डर आने के इंतजार में अटका काम

नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। उप नगरीय क्षेत्र लालबाग से चिंचाला को जोड़ने के लिए करीब 13 साल पहले शुरू किया गया रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अब भी अधूरा पड़ा है। जिसके कारण क्षेत्र की बीस हजार से ज्यादा की आबादी अब भी सुगम आवागमन के लिए परेशान है। इतना ही नहीं वर्षाकाल के समय चिंचाला क्षेत्र के लोगों को कई घंटे तक अपने घरों में कैद होने के लिए विवश हो जाएंगे

2013 में शुरू किया गया था निर्माण कार्य

ज्ञात हो कि इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य वर्ष 2013 में शुरू किया गया था। तब इसकी लागत करीब 15 करोड़ रुपये थी। निर्माण कार्य में लगातार हुई देरी के कारण इसकी लागत दो साल पहले 46 करोड़ रुपये हो गई थी। वर्तमान में यह पचास करोड़ से ज्यादा हो गई है। जिला प्रशासन और रेलवे को लगातार ज्ञापन सौंपने के बाद भी जब कोई हल नहीं निकला तो अब क्षेत्र के लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा है।


रेलवे के हिस्से का काम अधूरा

रेलवे ओवरब्रिज का प्रदेश सरकार वाला हिस्सा यानी दोनों ओर का ब्रिज करीब छह साल पहले ही सेतु निगम ने तैयार कर दिया था। रेलवे के हिस्से वाला हिस्सा ही शेष बचा है। रेलवे ठेकेदार ने पहले हैदराबाद से गर्डर निर्माण कराने की बात कही थी, लेकिन अब भिलाई से गर्डर निर्माण में देरी होने की बात कह रहा है। रेलवे के अधिकारी भी इस बात की सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं कि ब्रिज का निर्माण कब तक पूरा होगा। हालांकि उन्होंने इस साल ब्रिज निर्माण पूरा होने की बात कही है।

पहाड़ों से उतरता है पानी

ज्ञात हो कि चिंचाला क्षेत्र के नागरिकों के शहर आवागमन के लिए रेलवे की पुलिया ही एकमात्र रास्ता है। तेज वर्षा के दौरान इस पुलिया में चार फीट से ज्यादा पानी भर जाता है। जिसके कारण आवागमन बंद हो जाता है और लोग घरों में कैद होकर रह जाते हैं। बरसात के मौसम में कई बार प्रसूताओं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों और किसानों को भी उपज लाने ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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अंडरपास का काम भी नहीं हुआ

चिंचाला क्षेत्र के लिए आवागमन का एक और मार्ग दिलाने के लिए सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने सिंगल मारुति मंदिर केपास से रेलवे अंडरपास निर्माण की भी घोषणा की थी। इसके लिए रेल अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण भी किया था, लेकिन इसके बाद से काम आगे नहीं बढ़ा। इसे लेकर भी स्थानीय लोगों ने कई बार सांसद और विधायक से चर्चा की लेकिन अब तक इसका काम भी शुरू नहीं हो पाया है।