
नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर धाम पर रविवार को सातवें 305 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह समारोह पूरी भव्यता के साथ हुआ। मंच पर एक के बाद एक दूल्हा दुल्हन के जोड़ों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। जहां संत महात्माओं के मुख से निकलते वैदिक मंत्रोच्चार गुंजायमान हो रहे थे। मंडप में मौजूद हजारों लोगों की आंखों में गरीब कन्याओं के प्रति प्रेम और आशीर्वाद उमड़ रहा था।
इस विवाह महोत्सव में मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल सहित आठ देशों के राजदूत आए, जिन्होंने गरीब कन्याओं को आशीर्वाद दिया और इस विवाह महोत्सव को बहुत ही भव्य और यादगार बताया।
करीब 50 देशों के एनआरआई इस महोत्सव में शामिल हुए। जिन्होंने कन्याओं को विवाह की थालियां देने की रस्म निभाई। थाली में सोने की कील, रामचरित मानस, लड्डू गोपाल सहित अन्य उपहार शामिल थे। धाम की ओर से हर बेटी के लिए 30-30 हजार रुपए की एफडी प्रदान की गई। इस खास अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य भी पहुंचे। जिन्होंने बेटियों को आशीर्वाद प्रदान किया।
इस विवाह महोत्सव में करीब आठ से दस लाख लोग शामिल होने पहुंचे। सुबह से रात तक बागेश्वर धाम पहुंचने वालों को सिलसिला जारी रहा।इस अवसर पर दाती महाराज, संजय कृष्ण सलिल, मृदुल कांत शास्त्री, गुरु सिमरन सिंह पंजाब, श्रृंगारी महाराज, विधायक रवि राणा, राजू दास महाराज, बाल योगेश्वर दास महाराज सहित देशभर से लोग महोत्सव में शामिल हुए।
इस अवसर पर तुलसी पीठाधीश जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे जीवन भर वैदिक धर्म का निर्वहन करें और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का मिलन है। कार्यक्रम में उपस्थित दीदी मां ऋतम्भरा ने कहा कि सनातन संस्कार व्यक्ति को व्यक्ति नहीं समष्टि बनाते हैं।
बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज से यह सभी बेटियां अमीर हो। गई जिन बेटियों के ऊपर बागेश्वर नाथ का हाथ है वे अब अनाथ कैसे हो सकती हैं। महाराज जी ने कहा कि जिनका कोई नहीं है उन्हें विदेशी भी आशीर्वाद देने आए हैं। पूरी दुनिया बागेश्वर धाम से यह सीखेगी कि कैसे यहां से गरीब बेटियों के घर बसाने का कार्य किया जा रहा है। यह पूरा कार्य बालाजी की कृपा से ही हो रहा है।
इस बार का महोत्सव राष्ट्रीय नहीं अंतरराष्ट्रीय हो गया क्योंकि आठ देशों के राजदूतों ने आकर बेटियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुख में जीवन की कामना की। वहीं विवाह के 50 वर्ष पूरे होने पर कीनिया के दंपति ने लिए दो कन्यादान लिए। इस दौरान चिली के राजदूत हिस एक्सीलेंसी हुआन एंगुलो, पेरू के राजदूत हिस एक्सीलेंसी हावीयर मैनुअल पॉलिनिच वेलार्डे, उरुग्वे के राजदूत हिस एक्सीलेंसी अल्बर्टो एंटोनियो गुवानी अमररीला, एक्वाडोर के राजदूत हिस एक्सीलेंसी फर्नांडो हावियर बुचेली वर्गास, पैनामा के राजदूत हिस एक्सीलेंसी ओलांसो कोरिया मिगैल, पैराग्वे के राजदूत हिस एक्सीलेंसी फ्लेमिंग राउल दुआर्ते रामोस, सूरीनाम के सीडीए हर एक्सीलेंसी सुनैना परीक्षा रागिनी देवी, एल सालवाडोर के राजदूत हिस एक्सीलेंसी... गिलैरमो रूबियो फ्यूंस आदि शामिल रहे। जाे भारतीय बेटियों को आशीर्वाद देते दिखे।
दूल्हा बनकर जबलपुर से आए सौरभ ने बताया कि उनको कभी विश्वास ही नहीं था कि एक दिन उसका विवाह ऐसी भव्यता के साथ होगा। जिनको देखने के लिए पूरी दुनिया परेशान होती है उनके आशीर्वाद से विवाह हुआ है। सब बालाजी की कृपा से हुआ है। वहीं छतरपुर के बेटी सरोज ने बताया कि मन बेहद खुश है कि ऐसी भव्यता के साथ बागेश्वर सरकार ने विवाह कराया है। उनका आशीर्वाद ही हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है।
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सामूहिक विवाह महोत्सव में सजधज कर दुल्हन बनी 305 बेटियों का विवाह और मंगल फेरे होने के बाद जब विदाई का अवसर आया तब बेटियां अपने आंसू नहीं रोक पाईं। वह अपने धर्म पिता पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से लिपटकर रोती दिखी। कुछ बेटियां ऐसी भी थी जिनके आंसू मंच पर ही आ गए थे। लेकिन यह आंसू खुशी के थे।