• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • ए आई बूटकैंप
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • छतरपुर

छतरपुर: भारी बारिश के बीच सातवें दिन भी जारी रहा 'चिता आंदोलन', मुआवजा बढ़ने के बाद भी न्याय के लिए अड़े ग्रामीण

नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका के बावजूद अमित भटनागर के नेतृत्व में डटे रहे आदिवासी, किसान और महिलाएं।

By Bharat SharmaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Fri, 10 Jul 2026 11:45:44 AM (IST)Updated Date: Fri, 10 Jul 2026 11:46:16 AM (IST)
छतरपुर: भारी बारिश के बीच सातवें दिन भी जारी रहा 'चिता आंदोलन', मुआवजा बढ़ने के बाद भी न्याय के लिए अड़े ग्रामीण
चिता आंदोलन में न्याय के डटी आदिवासी महिलाएं, किसान और ग्रामीण। वीडियोग्रेब

HighLights

  1. आंशिक जीत, पर जारी रहेगा संघर्ष
  2. भ्रष्टाचार की जांच पर अड़े विस्थापित
  3. बारिश और तेज बहाव का खतरा

नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय, रूंझ, नेगुवा तथा अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का 'चिता आंदोलन' सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने इसे अपनी आंशिक जीत बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा कुछ मुआवजा राशि बढ़ाए जाने के बावजूद आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्याय और कथित भ्रष्टाचार के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती।

आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं, किसान एवं ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। इधर नदी में ताज बहाव का भी डर है।

संघर्ष के आ रहे हैं परिणाम

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके लगातार संघर्ष का परिणाम है कि रूंझ और मझगांय क्षेत्र में मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये किए जाने की घोषणा हुई है। साथ ही पन्ना जिले के केन-बेतवा परियोजना क्षेत्र के लिए 39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने इसे संघर्ष की आंशिक सफलता बताया, लेकिन कहा कि अभी भी अनेक प्रभावित परिवार न्याय से वंचित हैं।


आंदोलनकारियों की मांग है कि सभी वास्तविक विस्थापितों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास दिया जाए, परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों का उत्पीड़न बंद किया जाए।

ये हैं मांगें

  • सभी विस्थापित परिवारों को भूमि और आवास का उचित व सम्मानजनक मुआवजा मिले।
  • परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच हो।
  • भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें जेल भेजा जाए।
  • विस्थापितों को डराने-धमकाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई तत्काल बंद की जाए।