• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • ए आई बूटकैंप
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • छतरपुर

केन-बेतवा परियोजना: गलत सर्वे सूची में उलझे किसान, वर्षों पुराना पैतृक कुआं रिकॉर्ड में दूसरे के नाम चढ़ा

त्रुटि को सुधरवाने के लिए किसान पटवारी से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है।

By Bharat SharmaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 11:02:44 AM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 11:06:40 AM (IST)
केन-बेतवा परियोजना: गलत सर्वे सूची में उलझे किसान, वर्षों पुराना पैतृक कुआं रिकॉर्ड में दूसरे के नाम चढ़ा
परेशान किसान। सोशल मीडिया

HighLights

  1. जमीन बेचने के बाद सर्वे में हुई गड़बड़ी
  2. खसरा नंबर 436 और 437/2 का फेर
  3. मुआवजे पर संकट, आंदोलन की चेतावनी

नईदुनिया न्यूज, महाराजपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के सर्वे में कथित गड़बड़ियों से ग्राम मऊपुर के किसान परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी पैतृक जमीन पर बना वर्षों पुराना कुआं गलत तरीके से दूसरे हितग्राही के नाम सर्वे सूची में दर्ज कर दिया गया है। इस त्रुटि को सुधरवाने के लिए किसान पटवारी से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है।

किसान तीनों आपस में हैं भाई

जानकारी के अनुसार ग्राम मऊपुर निवासी मगना,चत्तु,पंचा और बिहारी अनुरागी आपस में भाई हैं। चत्तु अनुरागी के निधन के बाद उनकी जमीन का नामांतरण शंकर, पूनम, रामप्रसाद, भगुंती,शांति और राजाबाई पुत्र-पुत्री एवं पत्नि के नाम पर दर्ज किया गया था।


किसानों के मुताबिक 25 जनवरी 2024 को मगना अनुरागी ने कुएं वाले खसरे को छोड़कर अपने हिस्से की शेष जमीन ग्राम की केसर पति मुन्ना पटैल को विक्रय कर दी थी। विक्रय की गई भूमि में खसरा नंबर 429/1,430/2,435/3, 437/2,438/1,439/2,848/1, 851/1 और 852/1 शामिल हैं, जिनका कुल रकबा 0.900 हेक्टेयर है।

पटवारी की गलती से कुआं पहुंच गया गलत खसरे में

इसके बाद केन-बेतवा परियोजना का सर्वे हुआ जिसमें किसानों का आरोप है कि उनके कुएं को पटवारी ने गलत खसरे में दर्ज कर दिया गया। किसान पंचा और बिहारी अनुरागी का कहना है कि उनकी पैतृक भूमि के खसरा नंबर 436 रकबा 0.0490 में चारों भाइयों के नाम के साथ कुआ दर्ज है लेकिन सर्वे सूची में उसे खसरा नंबर 437/2 में दिखाते हुए केसर पटैल के नाम जोड़ दिया गया है।

इस गड़बड़ी से किसानों को मुआवजा और स्वामित्व संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित किसानों ने तहसीलदार, एसडीएम और जिला कलेक्टर को आवेदन देकर सर्वे सूची में सुधार की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो वे ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे।

मेरे द्वारा जांच की गई है रिकार्ड के अनुसार 437/2 में कुआ दर्ज है और खसरा नंबर 436 बगल से लगा हुआ है। जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी गई हैं। - कल्पना अहिरवार, पटवारी, हल्का मऊपुर तहसील महाराजपुर।

ये है मामला

  • खसरा नंबर 436 में वर्षों पुराना पैतृक कुआं होने का किसानों का दावा।
  • भूमि विक्रय के दौरान कुएं वाली भूमि को अलग रखने की बात।
  • केन-बेतवा परियोजना के सर्वे में कुएं को खसरा नंबर 437/2 में दर्ज किया गया।
  • किसानों का आरोप कि इससे कुएं का स्वामित्व दूसरे व्यक्ति के नाम से जुड़ गया।
  • मुआवजे और स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति बनी।
  • किसान सर्वे रिकॉर्ड में सुधार और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
  • प्रशासन को कई स्तरों पर शिकायतें सौंपने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।