
नईदुनिया प्रतिनिधि, छिंदवाड़ा। विषाक्त कोल्ड्रिफ कफ सीरप से मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के 25 मासूम बच्चों की मौत की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। 17 मृत बच्चों की विसरा रिपोर्ट ने मौत की असली वजह से पर्दा उठा दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि सीरप में जानलेवा रसायनों की मिलावट थी। मौत का मुख्य कारण डाई-एथीलिन ग्लाइकोल (डीईजी) और अमानक प्रोपिलीन ग्लाइकोल की मौजूदगी पाई गई है। यह रसायन आमतौर पर कफ सीरप में विलायक (साल्वेंट) के रूप में इस्तेमाल होता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन सीधे किडनी फेलियर और मौत का कारण बनता है।
एसआइटी के अधिकारियों का कहना है कि अब इस मामले में अन्य चिकित्सकों की भूमिका और उन पर कानूनी कार्रवाई का फैसला चिकित्सकीय समिति (मेडिकल बोर्ड) की राय के बाद ही लिया जाएगा। डा. प्रवीण सोनी और कोल्ड्रिफ कफ सीरप कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन जेल में हैं। डॉ. सोनी 17 अगस्त से ही बच्चों की लगातार जांच कर रहे थे। बच्चों की मौत होने के बावजूद उन्होंने समय रहते मामले का संज्ञान नहीं लिया और न ही उच्च अधिकारियों को सतर्क किया। उनकी भूमिका 'प्रिस्क्रिप्शन' से कहीं आगे 'लापरवाही' की श्रेणी में आ रही है। वहीं डा. सिद्दकी और डा. ठाकुर पर आरोप हैं कि उन्होंने सीरप लिखा था, जिससे दो बच्चों की मौत हुई। प्राथमिक तौर पर उनकी भूमिका केवल 'दवा लिखने' तक सीमित पाई गई है। फिलहाल उन पर प्रकरण विचाराधीन है।
मृत बच्चों के स्वजन ने 17 फरवरी से अनशन के लिए पुलिस-प्रशासन से अनुमति मांगी है। अधिवक्ता संजय पटोरिया का कहना है कि बच्चों की मौत की जांच सही दिशा में नहीं जा रही है। अभी भी कई चिकित्सक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। बच्चों की विसरा रिपोर्ट में जहरीले तत्वों की पुष्टि एक अहम साक्ष्य है। जहां तक अन्य चिकित्सकों की भूमिका का सवाल है तो उनके विरुद्ध मामला दर्ज करने या आगे की कार्रवाई करने से पहले चिकित्सकीय समिति की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
समिति यह तय करेगी कि क्या डॉक्टरों ने मानक प्रोटोकाल का उल्लंघन किया था। रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जितेंद्र जाट, एसडीओपी और जांच अधिकारी ने बताया कि विसरा रिपोर्ट में जहरीले तत्वों की पुष्टि एक अहम साक्ष्य है और मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही आगामी कदम उठाए जाएंगे।
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