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दमोह के किसान के नाम 1.86 करोड़ का बिजली बिल, लोक अदालत के नोटिस से मचा हड़कंप

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बनवार वितरण केंद्र अंतर्गत किसान गोले सिंह लोधी के नाम जारी ...और पढ़ें

By Sunil GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 09:14:10 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 09:14:10 PM (IST)
दमोह के किसान के नाम 1.86 करोड़ का बिजली बिल, लोक अदालत के नोटिस से मचा हड़कंप
मामले की जानकारी देता हुआ पीडि़त। नईदुनिया 

HighLights

  1. 18 जून 2025 को तैयार किया गया था
  2. पंचनामा क्रमांक भी नोटिस में दर्ज है
  3. विभाग की ही अधिकारी से सवाल

नईदुनिया न्यूज, बनवार। इतनी बड़ी रकम का नोटिस सामने आते ही किसान और ग्रामीणों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई। नोटिस में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126/135/138 के तहत प्रकरण का उल्लेख किया गया है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार यह प्रकरण सतर्कता ओएंडएम दल द्वारा 18 जून 2025 को तैयार किया गया था, पंचनामा क्रमांक भी नोटिस में दर्ज है।

दाण्डिक बिल राशि शून्य बताई गई है

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक किसान के नाम आखिर 1.86 करोड़ की राशि किस गणना के आधार पर तय की गई, नोटिस में प्रशमन प्रभार की राशि एक करोड़ 86 लाख 58 हजार दर्शाई गई है जबकि दाण्डिक बिल राशि शून्य बताई गई है। मामला तब और गंभीर हो जाता है जब इस पूरे प्रकरण को लेकर विभाग की ही अधिकारी से सवाल किया गया।


ह बिल गलती से आ गया है

नोहटा जेई पूजा ने बताया कि यह बिल गलती से आ गया है और बिल लाक खुलने के बाद इसमें सुधार कर दिया जाएगा। इतनी बड़ी राशि वाला नोटिस वास्तव में गलती से जारी हुआ तो विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी गलती हुई कैसे, क्या नोटिस जारी करने से पहले राशि और प्रकरण की जांच नहीं की गई और अगर किसान के नाम करोड़ों रुपये की देनदारी दर्शाई गई तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

लोक अदालत का नोटिस भेजने की नौबत ही क्यों आई

विभाग ने नोटिस में 12 सितंबर 2026 की नेशनल लोक अदालत में आपसी सहमति से प्रकरण के निराकरण और नियमानुसार छूट का उल्लेख किया है, लेकिन जब विभाग खुद इसे गलती से आया बिल बता रहा है तो सवाल यह भी है कि किसान को लोक अदालत का नोटिस भेजने की नौबत ही क्यों आई।

बड़ी राशि किसान के नाम किस आधार पर दर्ज हुई थी

फिलहाल इस मामले ने बिजली विभाग की बिलिंग व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और जवाबदेही पर कई सवाल खड़े कर दिए है। अब देखने वाली बात होगी कि बिल में कब तक सुधार होता है और इतनी बड़ी राशि किसान के नाम किस आधार पर दर्ज हुई थी इसका स्पष्ट जवाब विभाग कब देता है।

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