
नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। लगातार छह वर्ष अपनी शाला से नियम विरुद्ध तरीके से गायब रहकर अधिकारी बने शिक्षक को नए कलेक्टर के भय के चलते आखिर स्कूल में आकर अपना प्रभार ग्रहण करना ही पड़ा।
जिस प्रकार से इन्होंने उत्कृष्ट विद्यालय के बच्चों के भविष्य के साथ खिडवाड़ की है। इस मामले में तथा उनके द्वारा जो नियम विरुद्ध तरीके से कार्य किए गए है उस पर कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की गई है।
तत्कालीन कलेक्टर के लगातार इर्दगिर्द घूमने के कारण छह वर्षों से अधिकारी बनकर जिस प्रकार से जिले के प्राचार्य को डरा धमका कर नियम विरुद्ध तरीके से रमसा के आने वाले बजट का नियम विरुद्ध तरीके से व्यय कर रहे थे।
इस मामले में नए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के आने के चलते कार्रवाई ना हो इससे आनन-फानन में स्कूल में जाकर अपना प्रभार ग्रहण कर लिया।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा छह मार्च को जारी किए गए एक आदेश के तहत जिसमें जो भी शिक्षक शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त अन्य पदों पर कार्य कर रहे हैं। उन्हें तत्काल हो उनकी मूल शाला में पदस्थ करने के लिए कार्य मुक्त करने के आदेश के तहत जिला शिक्षा अधिकारी दमोह ने 31 मार्च को एक आदेश जारी किया।
आदेश में इस प्रकार के शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए थे और उसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यदि इस पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई तो निर्मित होने वाली अप्रिय स्थिति के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं इस बात को भूल गए थे कि जिस प्रकार का आदेश वह स्वयं जारी कर रहे है, उस प्रकार के आदेश की अप्रिय स्थिति के लिए वह विगत अनेक वर्षों से स्वयं उत्तरदायी है।
इन छह वर्षों में यह दोनों आज तक पढाने के लिए स्कूल नहीं गए और इन्हें कार्य मुक्त करने के लिए अनेकों बार वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव द्वारा भी निर्देशित किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें कार्य मुक्त नहीं किया और वह नियम विरुद्ध तरीके से छह वर्ष से अधिकारी बने रमसा के करोड़ों रुपए के बजट पर वित्तीय अनिमित्तायें करते हुए हेरा-फेरी करते रहे है, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के कानों में जू नहीं रेग रही थी।
छह वर्षों से स्कूल से गायब रहने के बाद भी तत्कालीन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर द्वारा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के शिक्षक मोहन राय को कार्य करने के लिए प्रशंसा पत्र प्रेषित किया गया था।
शाला से छह वर्षों से गायब रहकर किसी भी प्रकार का कोई शिक्षण कार्य नहीं कराया गया है और वह रमसा में अधिकारी बने लगातार ही प्राचार्य एवं अन्य अधिकारियों को डरा धमकाकर वित्तीय अनियमितता कर रहे हैं।
अनेक प्रमाणों की शिकायतों के बाद भी अधिकारियों का संरक्षण होने के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही थी। इसके बाद भी तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें प्रशंसा पत्र प्रदान किया था जिससे अधिकारियों की छवि भी स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो रही कि वह कैसे अधिकारियों को संरक्षण प्रदान किए हुए है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र क्रमांक टीएमसी/टीएमसी 03/081/2026/139 भोपाल दिनांक 6/3/2026 एवं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्र क्रमांक/स्था.3/2026/1950 दमोह दिनांक 9/3/2026 द्वारा भी ऐसे शिक्षकों को कार्य मुक्त किए जाने के निर्देश दिए थे लेकिन इसके बाद भी इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई थी।
यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि जिला शिक्षा अधिकारी एसके नेमा लोक शिक्षण संचानालालय को पूर्व में भी गुमराह कर चुके है, क्योंकि इसके पूर्व जब भी इस प्रकार के पत्र आए जिसमें किसी भी शिक्षक के संलग्नीकरण की जानकारी मांगी गई तो उनके द्वारा इस मामले में गुमराह करते हुए जानकारी निल भेजी गई जबकि ऐसे अनेक शिक्षक है जो नियम विरुद्ध तरीके से मोटी रकम लेकर संलग्न किए गए हैं।
यहां पर यह उल्लेखनीय है कि कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा जिस प्रकार से प्रशासनिक कसावट लाने के लिए कार्य किया जा रहे है। उसका परिणाम यह हो रहा है कि जिले में प्रशासन में काफी कसावट आ चुकी है। यही कारण है कि इस मामले में भी कलेक्टर द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई ना हो सके। इसके पहले ही शिक्षक मोहन राय ने शाला में जाकर अपनी उपस्थिति दे दी, लेकिन इनका जो आदेश हुआ था उसे आदेश के तहत इन्होंने एक भी दिन शिक्षण कार्य नहीं किया। इस मामले में उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई एवं वेतन वसूली की कार्रवाई भी किए जाने की चर्चाएं चल रही है।
छह वर्षों से लगातार शाला से अनुपस्थित शिक्षक मोहन राय द्वारा तीन दिन पूर्व अपनी उपस्थिति शाला में दे दी है।
आरपी पटेल, प्राचार्य, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय दमोह
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