
नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह और जबलपुर में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करते पकड़े गए तीनों 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' को बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में उनकी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल का पंजीयन फर्जी पाया गया है।
डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच शुरू
प्रशासन ने अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत दमोह जिले में पदस्थ 13 अन्य संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। इस फर्जीवाड़े के तार प्रदेश के कई जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दमोह, जबलपुर और भोपाल से पांच आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद मुरैना, शिवपुरी, गुना और ग्वालियर के पुलिस-प्रशासन को भी संदिग्ध फर्जी डॉक्टरों की जानकारी भेजी है।
कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि मुख्य आरोपित हीरा सिंह कौशल और कंप्यूटर ऑपरेटर आदिल सिद्दीकी से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि हीरा सिंह कौशल वर्ष 2021 में भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फर्जी डिग्री और स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित सांठगांठ से सरकारी नौकरी दिलाने का नेटवर्क तैयार कर लिया था।
15 संविदा डॉक्टरों में से 13 को दोबारा दस्तावेज सत्यापन के लिए नोटिस
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी ने आदेश जारी कर दमोह के संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ रहे कुमार सचिन यादव और जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ रहे अजय मौर्य की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। तीसरे फर्जी डॉक्टर राजपाल गौर की सेवा समाप्ति का आदेश भी जल्द जारी किया जाएगा। तीनों आरोपित फिलहाल जिला जेल में बंद हैं। वहीं सीएमएचओ कार्यालय ने दमोह जिले में पदस्थ 15 संविदा डॉक्टरों में से 13 को दोबारा दस्तावेज सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया है।
मिशन अस्पताल मामले में अब भी तीन आरोपित फरार
दमोह में एक वर्ष पहले मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ने डॉ. एन जान कैम के नाम का उपयोग कर हार्ट सर्जरी की थी, जिसमें सात मरीजों की मौत हो गई थी। आरोपी डॉ. एन जान कैम उर्फ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव फिलहाल सागर जेल में बंद है। इस मामले के नौ आरोपितों में से पांच जमानत पर रिहा हो चुके हैं, जबकि तीन अन्य आरोपित डॉ. अजय लाल, डॉ. इंदु लाल और अभिजीत लाल अमेरिका फरार बताए जा रहे हैं।
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