
नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। शहर में स्थित शासकीय संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ दो डाॅक्टरों की डिग्री फर्जी होने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में उनके फर्जी दस्तावेजों के संबंध में भी जांच की जा रही है।
वहीं कुछ डाॅक्टर के फर्जी होने की और भी जानकारी मिलने पर पुलिस दमोह सहित अन्य जिलों में भी इस मामले में दबिश दे रही है जिससे इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो सके।
दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से एक प्रतिवेदन प्राप्त हुआ जिसमें डाॅ. कुमार सचिन यादव पुत्र छत्रपाल सिंह यादव निवासी मेहरा मंदिर शंकुतलापुरी के पीछे ग्वालियर एवं डा. राजपाल गौर पुत्र रमेश गौर निवासी काकूखेडा पोस्ट मगरधा सीहोर के द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित संजीवनी क्लिनिक सुभाष कालोनी दमोह हेतु चयन प्रक्रिया में स्वयं को योग्य चिकित्सक प्रदर्शित करने के उद्देश्य से फर्जी एवं कूट रचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र तथा अन्य शैक्षणिक एवं पंजीयन दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उक्त दोनो सचिन यादव एवं राजपाल गौर करीब एक वर्ष से नियुक्त थे। संबंधित द्वारा शासकीय संस्था को धोखा देकर न केवल अवैध लाभ प्राप्त किया जा रहा था बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य एवं जीवन के साथ गंभीर खिलवाड भी किया गया।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिह भदौरिया, नगर पुलिस अधीक्षक एचआर पाण्डेय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक मनीष कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त दोनो आरोपितों के विरुद्ध थाना कोतवाली में केस दर्ज किए गए।
दोनों आरोपियों को कोतवाली पुलिस द्वारा विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया। उक्त दोनो आरोपितों से पूछताछ पर से फर्जी डाॅ. अजय मौर्य पुत्र मनीराम निवासी धमकन रोड अलापुरा जोरा मुरैना हाॅल चेरीताल जबलपुर थाना कोतवाली जबलपुर की भूमिका होने व जबलपुर संजीवनी अस्पताल में कार्यरत होने की जानकारी मिलने पर तत्काल टीम गठित कर अभिरक्षा मे लिया गया है।
फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर फर्जी डाॅक्टर बनाकर राज्य स्तर की संस्था के माध्यम से नियुक्तिया कराना बहुत ही गंभीर एवं संवेदनशील विषय है। सभी संजीवनी अस्पताल आम जन के बीच में संचालित है जिससे जनमानस का स्वास्थ्य व इलाज सीधा जुडा है। इसमे भोपाल स्तर की संस्थाओ की भूमिका भी संदिग्ध है।
आरोपितों से पूछताछ पर पैसा देकर बने कई फर्जी डाॅक्टर के नाम एवं पैसा लेकर संजीवनी अस्पताल मे डाक्टरो को नियुक्त कराने के लिए फर्जी एमबीबीएस डिग्री, डाक्टर रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों एवं सहयोग करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम सामने आएं है जिनके लिए टीमें तलाश में लगी हई है।
इस मामले में सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारी कर्मचारियों में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक मनीष कुमार, उनि नीतेश जैन, सउनि रमाशंकर मिश्रा, प्रआर सौरभ टंडन, प्रआर राकेश अठ्या सायबर सेल, प्रआर हेमंत अवस्थी, प्रआर अभिषेक चौबे, प्रआर महेश यादव, प्रआर अजीत दुबे, आरक्षक ओमप्रकाश रैकवार, ब्रजेन्द्र मिश्रा आदि प्रमुख है।
इस मामले में कुमार सचिन यादव के बताए जाने पर जबलपुर से तीसरे आरोपित डा. अजय मौर्य पुत्र मनीराम मौर्य निवासी धमकन रोड अलपुरा जोरा मुरैना हाल चेरीताल जबलपुर भी ढाई वर्ष से पदस्थ था जिसे भी गिरफ्तार किया गया है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैसा लेकर बनाए गए ऐसे कई फर्जी डाॅक्टर के नाम इन पकड़े गए डाॅक्टरों ने बताए है। जो कि भोपाल में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मिली भगत के चलते फर्जी एमबीबीएस डिग्री डाॅक्टर रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले तथा नियुक्ति के दौरान इन्हें पुष्ट करने वाले अधिकारियों की भी तलाश की जा रही है।
सीएमएचओ डॉक्टर राजेश अठया बोले- 10 दिन पहले अज्ञात फोन आया था, बोला कि दमोह के संजीवनी अस्पताल में दो फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर कार्य कर रहे हैं। इस पर जांच कमेटी बनाई और दस्तावेज जांचें तो डिग्रियां फर्जी मिलीं। पुलिस ने इन दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस मामले में अभी जांच टीम द्वारा लगातार भी अन्य बिंदुओं को लेकर जांच की जा रही है। इसमें अभी अनेक फर्जी डाॅक्टरों के और भी मिलने की आशंका है।
आनंद कलादगी, पुलिस अधीक्षक, दमोह
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