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दतिया उपचुनाव में हार के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस 2-2 की बराबरी पर, जानिए पूरी चुनावी तस्वीर

भाजपा को मध्य प्रदेश के दतिया सीट के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इस परिणाम को मिलाकर प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद हुए चार विधानसभा सीटों के ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 08:04:16 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 08:04:16 PM (IST)
दतिया उपचुनाव में हार के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस 2-2 की बराबरी पर, जानिए पूरी चुनावी तस्वीर
दतिया उपचुनाव में हार के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस 2-2 की बराबरी पर

HighLights

  1. दतिया उपचुनाव में जीती कांग्रेस, उप-चुनावों में 2-2 की बराबरी
  2. जनता ने दतिया और विजयपुर में थोपे गए उपचुनावों को नकारा
  3. विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या फिर बढ़कर 65 हुई

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भाजपा को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट के बाद अब दतिया सीट के उपचुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा है। इस परिणाम को मिलाकर प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद हुए चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दो-दो की बराबरी पर आ गई हैं। पहली दो सीटें भाजपा ने जीतीं तो बाद की दो सीटें कांग्रेस ने जीतीं। ये दोनों सीटें कांग्रेस की ही थीं और अलग-अलग कारणों से रिक्त हुईं। अब विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या फिर 65 हो जाएगी।

विधानसभा चुनाव में बुदनी से निर्वाचित होने के बाद पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विदिशा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया था। वे निर्वाचित हुए और बुदनी सीट रिक्त हो गई। इस पर हुए उपचुनाव में भाजपा के रमाकांत भार्गव चुने गए। इसी तरह छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। यहां हुए उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद श्योपुर जिले का विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के भाजपा में जाने से हुआ। भाजपा सरकार में वह वन मंत्री बनाए गए। उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने उन्हें हरा दिया।


यही स्थिति दतिया सीट को लेकर बनी। यहां से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती आर्थिक धोखाधड़ी के एक मामले में न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद वे अयोग्य हो गए और विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित कर दी। भारती को न्यायालय से कोई राहत भी नहीं मिली। इसे देखते हुए उपचुनाव कराया गया, जिसमें कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। इस प्रकार देखा उपचुनावों में जीत के मामले में भाजपा और कांग्रेस बराबरी पर आ गई हैं।

थोपे हुए उपचुनाव को मतदाताओं ने नकारा

परिणामों से साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में जनता थोपे हुए उपचुनाव को नकार देती है। विजयपुर और दतिया में यह सामने आ चुका है। विजयपुर का उपचुनाव रामनिवास रावत के विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने के कारण हुआ तो दतिया में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होना वजह बना। दोनों ही चुनाव में सत्ताधारी दल को मतदाताओं ने नकार दिया।

नरोत्तम के पहले सिर्फ एक बार भाजपा और एक बार जनसंघ ने दतिया में जीत दर्ज की थी

दतिया विधानसभा सीट में कभी भी कोई पार्टी एकतरफा जीत हासिल नहीं कर पाई। कड़े मुकाबले में ही हार-जीत का निर्णय हुआ। डॉ. नरोत्तम मिश्रा 2008, 2013 और 2018 में लगातार तीन बार इस सीट से भाजपा से निर्वाचित हुए। इसके पहले भाजपा 1990 में यहां जीती थी, जब पार्टी के टिकट पर शंभू तिवारी निर्वाचित हुए थे। इसके पहले 1972 में भारतीय जनसंघ ने जीत हासिल की थी।

1977 के चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद यहां से श्याम सुंदर सैयाम जीते थे। 1980 में वह फिर कांग्रेस से निर्वाचित हुए। 1985 में कांग्रेस से ही राजेंद्र भारती जीते। खुद घनश्याम सिंह जो इस उपचुनाव में विजयी हुए, 1993 और 2003 में भी इसी सीट से कांग्रेस की टिकट पर जीत चुके हैं।

इस सीट पर जीत का अंतर भी अधिकतर चुनावों में 10 हजार से नीचे ही रहा है। वर्ष 2023 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7742 मतों से हराया था, जबकि 2018 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा भारती से ही खड़े संघर्ष में 2656 मतों से जीत पाए थे। 2003 के चुनाव में घनश्याम सिंह भाजपा के अवधेश नायक से 2904 मतों से जीते थे।

बसई में पहली बार भाजपा ने कांग्रेस को गढ़ में हराया

दतिया विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का गढ़ रहे बसई में पहली बार भाजपा ने विजय हासिल की। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को संगठन ने केवल यहीं सभा करने कहा था। यहां का जब परिणाम सामने आया तब 13 राउंड तक कांग्रेस लगभग 13,000 वोट से आगे चल रही थी। 14वां और 15वां चक्र बसई का था। इन अंतिम दो चक्र की गणना में भाजपा ने जीत का अंतर आधा कर दिया। यहां भाजपा लगभग 6000 वोट से जीती।

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