• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • दतिया

दतिया उपचुनाव में माइक्रो मैनेजमेंट का महासंग्राम, पिछड़ा वर्ग बनेगा जीत की चाबी... आधी आबादी को साधने में जुटीं भाजपा और कांग्रेस

Datia Bypoll: दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस जातीय व सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी हैं।

By Jogendra SenEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 06:33:02 PM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 06:35:28 PM (IST)
दतिया उपचुनाव में माइक्रो मैनेजमेंट का महासंग्राम, पिछड़ा वर्ग बनेगा जीत की चाबी... आधी आबादी को साधने में जुटीं भाजपा और कांग्रेस
दतिया में आधी आबादी को साधने में जुटीं भाजपा और कांग्रेस

HighLights

  1. भाजपा का सामाजिक माइक्रो मैनेजमेंट तेज
  2. मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे रोड शो
  3. दतिया में दो लाख के करीब मतदाता

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों का भी बन गया है। दोनों दल अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा वोट बैंक होने के कारण चुनावी रणनीति का केंद्र बना हुआ है।

कांग्रेस की परंपरागत सीट पर भाजपा की नजर

दतिया विधानसभा सीट लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है। हालांकि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस सीट को कांग्रेस से छीनकर भाजपा के खाते में डाला था, लेकिन अगले चुनाव में कांग्रेस ने फिर जीत हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब उपचुनाव में भाजपा एक बार फिर इस सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही है।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल स्वयं चुनावी रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। पार्टी की कोशिश सामान्य वर्ग के साथ-साथ पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की है।

पिछड़ा वर्ग बना सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर

दतिया विधानसभा में करीब दो लाख मतदाता हैं। इनमें पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख नौ हजार है, जो कुल मतदाताओं का 50.7 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति के मतदाता 23.8 प्रतिशत, सामान्य वर्ग 17.6 प्रतिशत, मुस्लिम मतदाता 4.4 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के मतदाता 2.9 प्रतिशत हैं। इन्हीं सामाजिक समीकरणों को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने अभियान की दिशा तय की है।

भाजपा ने सामाजिक नेताओं को दी जिम्मेदारी

पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा ने सांसद भारत सिंह कुशवाह को दतिया का प्रभारी बनाया है। उनके साथ अपेक्स के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र पाल, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह सहित कई नेता गांव-गांव जाकर संपर्क अभियान चला रहे हैं। झांसी के यादव समाज के नेता भी प्रचार में सक्रिय हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रभाव को भी भाजपा चुनावी रणनीति का हिस्सा बना रही है। पार्टी पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा करा चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो करेंगे।

अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया और पूर्व मंत्री इमरती देवी सहित कई नेता प्रचार में जुटे हैं। सामान्य वर्ग में प्रभाव बढ़ाने के लिए पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया और ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया को जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी सामाजिक बैठकों में भाग ले चुके हैं, जबकि भाजपा के संभागीय प्रभारी निशांत खरे दतिया में लगातार कैंप कर रहे हैं।

कांग्रेस सामाजिक स्तर पर कमजोर दिख रही

कांग्रेस भी सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह सक्रिय हैं, जबकि पिछड़े वर्ग के बीच राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह प्रचार कर रहे हैं।

कांग्रेस के कई नेता दतिया पहुंच रहे हैं, लेकिन वार्ड और बूथ स्तर पर संगठन की कमजोरी के कारण उनका प्रभाव सीमित दिखाई दे रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाता एक बार फिर उसके साथ रहेंगे।

आजाद समाज पार्टी भी बदल सकती है समीकरण

इस उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव भी मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मौजूदगी भाजपा की तुलना में कांग्रेस के वोट बैंक पर अधिक असर डाल सकती है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का रुझान इस चुनाव का परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्ग मतदाताओं की संख्या प्रतिशत
कुल मतदाता लगभग 2,00,000 100%
पिछड़ा वर्ग 1,09,000 50.7%
अनुसूचित जाति 51,270 23.8%
सामान्य वर्ग 37,840 17.6%
मुस्लिम 9,461 4.4%
अनुसूचित जनजाति 6,320 2.9%