दतिया चुनावी रंग में सराबोर, शहर में बीजेपी का दबदबा तो गांवों में कांग्रेस की सेंधमारी, दिग्गजों के जोर के बीच वोटर की चुप्पी बनी पहेली
चुनावी शोर अपने चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने दिग्गज मैदान में उतार दिए हैं। शहर में भाजपा का प्रचार अधिक दिखाई देता है तो गांवों मे...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 09:04:57 AM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 09:49:36 AM (IST)
दतिया में उपचुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ रोड शो किया। नईदुनियाHighLights
- शहर में भाजपा का प्रचार हावी
- गांवों में कांग्रेस की डोर-टू-डोर कवायद
- दोनों दलों के दिग्गज नहीं छोड़ रहे कोई कसर
दतिया से बलराम सोनी। दतिया शहर पूरी तरह से भाजपा के झंडे-बैनर और होर्डिंग्स से अटा है। नेताओं की गाड़ियां इधर से उधर फर्राटे फर रही हैं। कलफ लगे कुर्ते-पायजामों में अंचल भर के नेता सिविल लाइंस की मुख्य सड़क की हर चाय-पकौड़ों की दुकान पर जमघट लगाए खड़े हैं। वजह, सोमवार की शाम को प्रदेश के मुखिया डा. मोहन यादव पीतांबरा माई के दरबार के सामने सभा करने के बाद पूरे शहर में रोड शो करने वाले हैं। इसलिए यहां पहुंचे हर ‘देवतुल्य’ की दिली तमन्ना है कि सीएम साहब ही नजर एक बार उन पर भी पड़ जाए।
कांग्रेस नेता-कार्यकर्ता दबे पांच घूम रहे गांव-गांव
सभा के मंच से जिस भी नेता को बोलने का मौका मिल रहा है वह सरकार के कल्याणकारी कामों की तारीफ करते नहीं थक रहा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता दबे पांव गांव-गांव घूमकर मतदाताओं को 30 तारीख को मतदान बूथ पहुंचकर दाऊ साहब (घनश्याम सिंह) को जिताने के लिए चिपचिपी वाली गर्मी में पसीना बहा रहे हैं। इनका नेतृत्व कर रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। वे रविवार रात दतिया पहुंचे और सबेरे ही गांवों की ओर निकल गए। इस सब के बीच हम भी पहुंच गए गांवों की ओर...।
दोपहर करीब दो बजे का समय, दतिया से करीब 25 किलोमीटर दूर ग्राम उदगवां। यहां कुछ ही देर पहले तिगेले (तिराहा) पर दिग्विजय सिंह नुक्कड़ सभा करके गए हैं। दो दिन पहले सीएम मोहन यादव ने यहीं मंडी परिसर में बड़ी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था।
चुनावी शोर अपने चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने दिग्गज मैदान में उतार दिए हैं। शहर में भाजपा का प्रचार अधिक दिखाई देता है तो गांवों में कांग्रेस लगातार संपर्क साध रही है। लेकिन इन सबके बीच मतदाता अब भी अपने पत्ते नहीं खोल रहा। चाय की दुकानों से लेकर चौपाल तक चर्चा तो खूब है, लेकिन मतदान किसके पक्ष में जाएगा, इसका जवाब हर कोई 30 जुलाई के लिए टाल रहा है।