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एआई पूछेगा मां और बच्चे की सेहत का हाल, खतरा दिखते ही करेगा अलर्ट, देवास में शुरू हुआ ‘हेलो माई’ प्रोजेक्ट

गर्भवती महिला की तबीयत कैसी है, जरूरी जांच हुई या नहीं, खानपान का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं और प्रसव की तैयारी पूरी है या नहीं... अब इन सवालों के जवाब जानने के लिए हर बार स्वास्थ्यकर्मी को घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

By deepak vishwakarmaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 08:51:14 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 08:51:14 AM (IST)
एआई पूछेगा मां और बच्चे की सेहत का हाल, खतरा दिखते ही करेगा अलर्ट, देवास में शुरू हुआ ‘हेलो माई’ प्रोजेक्ट
इस प्रकार दिखेगी वेबसाइट पर जानकारी। -सौजन्य

HighLights

  1. फोन पर गर्भवती महिलाओं से होगा संवाद
  2. हाई रिस्क केस की निगरानी के लिए बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
  3. एआई फोन कॉल के जरिए गर्भवती महिलाओं से संवाद करेगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास : गर्भवती महिला की तबीयत कैसी है, जरूरी जांच हुई या नहीं, खानपान का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं और प्रसव की तैयारी पूरी है या नहीं... अब इन सवालों के जवाब जानने के लिए हर बार स्वास्थ्यकर्मी को घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

देवास में शुरू हुए हेलो माई (हेलो मां एआई) प्रोजेक्ट के तहत एआई फोन कॉल के जरिए गर्भवती महिलाओं से संवाद करेगा। जवाबों के आधार पर जोखिम के संकेत मिलने पर संबंधित एएनएम, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को अलर्ट किया जाएगा। माना जा रहा है कि गर्भवती महिलाओं में जोखिम पहचानने के लिए देशभर में अपनी तरह का यह पहला नवाचारी प्रयास है।


सामान्य कीपैड फोन पर भी हिंदी में संवाद किया जा सकेगा

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने मंगलवार को इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की। सीएसआर सहयोग से संचालित होने वाले इस प्रोजेक्ट का एप निजी कंपनी ने तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि महिला को स्मार्टफोन, इंटरनेट या कोई मोबाइल एप इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होगी। सामान्य कीपैड फोन पर भी हिंदी में संवाद किया जा सकेगा।

गर्भावस्था के हर चरण में पूछे जाएंगे अलग सवाल

स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को आटोमेटेड एआई वायस काल जाएंगे। गर्भावस्था की तिमाही के अनुसार उनसे स्वास्थ्य, पोषण, जरूरी चिकित्सकीय जांच, सावधानियों, टीकाकरण और प्रसव की तैयारियों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। महिलाओं के जवाब सिस्टम में दर्ज होंगे और उनका विश्लेषण किया जाएगा।

जोखिम होने पर जाएगा अलर्ट

यदि किसी महिला के जवाब में गंभीर लक्षण या हाइ रिस्क की स्थिति सामने आती है, तो सिस्टम संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट भेजेगा। इसके बाद महिला से संपर्क कर आवश्यक चिकित्सकीय सहायता और फालोअप की प्रक्रिया की जा सकेगी। यानी फोन पर होने वाला संवाद सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरतमंद महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी मदद करेगा।

एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी जानकारी

प्रोजेक्ट के तहत अधिकृत स्वास्थ्य अधिकारियों को रियल-टाइम डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है। इसमें काल की स्थिति, महिलाओं के जवाब और लंबित फॉलोअप मामलों की जानकारी देखी जा सकेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन महिलाओं से संपर्क हो चुका है और किन मामलों में स्वास्थ्य अमले को आगे कार्रवाई करनी है।

नियमित रिमाइंडर की प्रक्रिया स्वचालित होने से मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों का समय बचेगा। वे सामान्य जानकारी देने और बार-बार याद दिलाने के बजाय उन महिलाओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगे, जिन्हें अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है।

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