
सत्येंद्रसिंह राठौर, नईदुनिया, देवास। रेल व वाहनों से आवागमन बेहतर बनाने के लिए जिले में दो बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ये हैं इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे फोरलेन व इंदौर-बुधनी रेल लाइन। इनका काफी हिस्सा वन विभाग की भूमि से होकर निकल रहा है। रेल लाइन में दो जगह 10 किमी से अधिक लंबी टनल बनाकर जंगल को सुरक्षित रखने के दावों के बीच दोनों प्रोजेक्ट के लिए हरियाली पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।
वन विभाग की चार रेंज में चार हजार से अधिक पेड़ों को काटा जा रहा है। वन विभाग की भूमि प्राेजेक्ट में जाने व पेड़ों के कटाई के बदले राजस्व विभाग की भूमि टोंकखुर्द क्षेत्र व अन्य जगह चिन्हित की गई जिसकी प्रक्रिया पूरी करके आवंटन वन विभाग को किया जा चुका है। हालांकि अभी प्लांटेशन कार्य की शुरुआत नहीं हो सकी है। दोनों प्रोजेक्ट में कटने वाले पेड़ों में सबसे अधिक सागौन प्रजाति के बताए जा रहे हैं, इसके अलावा पलाश व अन्य प्रजाति के पेड़ भी शामिल हैं। हाईवे के कार्य में लगभग 40 हेक्टेयर व रेल लाइन में 45 हेक्टेयर भूमि वन विभाग की गई है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार देवास, पानीगांव, जिनवानी, बागली रेंज में प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों को काटा गया है। कुछ जगह काम पूरा हो गया तो कुछ जगह अभी भी कटाई हो रही है। कटे हुए अधिकांश पेड़ों की लकड़ी चंद्रकेशर बांध डिपो पहुंचाई जा रही है। कटने वाले पेड़ों के बदले पौधे लगाने का काम वर्षाकाल में शुरू होने की बात कही जा रही है।
रेल लाइन व हाईवे निर्माण में कन्नौद व खातेगांव रेंज ऐसी है जहां वन विभाग की भूमि का उपयोग नहीं हुआ है। यहां पूरा काम राजस्व विभाग की भूमि से हो गया है, राजस्व की भूमि के सैकड़ों पेड़ भी काटे गए हैं। कन्नौद रेंजर सृजन जाधव व खातेगांव रेंजर जीएस निगवाल ने बताया वन विभाग की भूमि के पेड़ नहीं कटे हैं।
बागली के रेंजर गजानन बिरला ने बताया रेलवे लाइन के निर्माण में बागली रेंज की वन भूमि नहीं जा रही है। हाईवे के निर्माण में बारी नाका क्षेत्र में 120 मीटर का हिस्सा वन भूमि का है जिसके पेड़ों की कटाई हो चुकी है, इस हिस्से में अधिक पेड़ नहीं थे। सागौन व पलाश के पेड़ काटे गए हैं।
सबसे अधिक पेड़ों की कटाई पानीगांव रेंज व जिनवानी रेंज में की गई है। हालांकि यहां के रेंजरों ने इसको लेकर गोलमोल जवाब दिए हैं। पानीगांव की रेंजर मनीषा बुंदेला ने कहा हाईवे व रेल लाइन के लिए पेड़ों की कटाई का अधिकांश काम हो चुका है, कितने पेड़ काटे गए हैं, यह जानकारी रेंज कार्यालय जाकर ले लीजिए। फोन पर नहीं बताया जा सकता है। वहीं जिनवानी के रेंजर रामेश्वर उइके ने कहा मेरे आने के पूर्व कटने वाले पेड़ों की संख्या आदि निर्धारित हो चुकी थी। रेंज में कितने पेड़ कट रहे हैं, यह दिखवाता हूंं।
टोंकखुर्द विकासखंड के मोहम्मदखेड़ा व डबलचौकी क्षेत्र के गांव मिर्जापुर में रेल लाइन के बदले भूमि वन विभाग को मिली है। मिर्जापुर में 13 हेक्टेयर व मोहम्मदखेड़ा में 32 हेक्टेयर भूमि है। वहीं इंदौर-बैतूल हाईवे की भूमि के बदले मोहम्मदखेड़ा में 40 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग की वन विभाग को आवंटित की गई है।
वन विभाग की लगभग 80 हेक्टेयर भूमि दोनों प्रोजेक्ट में जा रही है। चार हजार से अधिक पेड़ कटेंगे, इसके बदले टोंकखुर्द क्षेत्र में व अन्य जगह राजस्व विभाग की भूमि का आवंटन वन विभाग को किया गया था। यहां पर प्लांटेशन किया जाना है, प्रक्रिया चल रही होगी। -संतोष शुक्ला, तत्कालीन एसडीओ वन देवास
इंदौर-बैतूल हाईवे, इंदौर-बुधनी रेल लाइन के साथ ही कुछ अन्य प्रोजेक्ट से संंबंधित भूमि भी शासन स्तर से वन विभाग को टोंकखुर्द व अन्य क्षेत्र में आवंटित की जा चुकी है। वन विभाग द्वारा आगे प्रक्रिया की जाएगी। -शोभाराम सोलंकी, अपर कलेक्टर देवास
देवास में चली आंधी से पेड़ गिरा, बागली-धावड़िया मार्ग दूसरे दिन भी रहा बंद, ग्रामीण हुए परेशान