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धार भोजशाला: हाई कोर्ट के फैसले के दो महीने बाद भी गाइडलाइन नहीं, ASI दिल्ली मुख्यालय से स्वीकृति का इंतजार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र मानने के निर्णय के बाद यहां श्रद्धालुओं को ...और पढ़ें

By PremVijay PatilEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 08:12:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 08:12:38 PM (IST)
धार भोजशाला: हाई कोर्ट के फैसले के दो महीने बाद भी गाइडलाइन नहीं, ASI दिल्ली मुख्यालय से स्वीकृति का इंतजार
धार भोजशाला: हाई कोर्ट के फैसले के दो महीने बाद भी गाइडलाइन नहीं

HighLights

  1. धार भोजशाला में हाई कोर्ट के फैसले के 2 महीने बाद भी गाइडलाइन नहीं
  2. दैनिक पूजन की नियमावली एएसआई दिल्ली मुख्यालय में अटकी, बढ़ी नाराजगी
  3. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी 'सरस्वती लोक' की योजना अधर में

नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र मानने के निर्णय के बाद यहां श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए प्रशासनिक कार्ययोजना और गाइडलाइन बनाई जानी थी, उसे निर्णय के दो माह बाद भी लागू नहीं किया जा सका है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के दैनिक पूजन एवं व्यवस्थाओं के प्रबंध के लिए नियमावली एएसआई के दिल्ली मुख्यालय से स्वीकृति के इंतजार में अटकी हुई है। उसके लिए कब तक इंतजार करना होगा, इस बारे में एएसआई के जिम्मेदार अधिकारी अभी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं। दरअसल, भोजशाला के लिए समृद्ध ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में संवारे जाने की श्रद्धालुओं को जो उम्मीद है, वह फिलहाल धरातल पर न उतरने से धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों में नाराजगी है।


हाई कोर्ट के निर्देश के बाद परिसर तो खुला, लेकिन प्रबंधन के इंतजाम नदारद

बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गत 15 मई को भोजशाला मामले में ऐतिहासिक निर्णय देने के साथ ही निर्देश दिया था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और सरकार मिलकर परिसर में धार्मिक गतिविधियों और संस्कृत शिक्षा के संचालन की रूपरेखा तैयार करें। श्रद्धालुओं को निर्बाध रूप से परिसर को खोलने के साथ ही दैनिक प्रबंध के लिए नियमावली बनाई जाए, लेकिन भोजशाला को श्रद्धालुओं के लिए खोल तो दिया गया, लेकिन अन्य मंदिरों की तरह यहां प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

भोजशाला को वाग्देवी मंदिर घोषित किए जाने का संघर्ष करने वाली संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के जिलाध्यक्ष आशीष गोयल का कहना है कि मंदिर में प्रवेश और पूजन के समय को लेकर कोई औपचारिक गाइडलाइन जारी नहीं किए जाने से श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है। संबंधित अधिकारियों से नई व्यवस्था के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि एएसआई के भोपाल कार्यालय ने गाइडलाइन बनाकर दिल्ली स्थित मुख्यालय भेज दी है। वहां से स्वीकृति मिलना बाकी है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी 'सरस्वती लोक' की कार्ययोजना में विलंब

बता दें कि कुछ समय पहले ही धार पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला परिसर में उज्जैन के श्री महाकाल महालोक की तर्ज पर 'सरस्वती लोक' विकसित करने की घोषणा की थी। शासन और प्रशासन को इसकी कार्ययोजना तैयार करनी है, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत भी नहीं हो सकी है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर, 14 जुलाई को होगी सुनवाई

इस बीच, हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली मस्जिद पक्ष की याचिका पर 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भी प्रतीक्षा है। यदि शीर्ष अदालत से कोई अंतरिम आदेश नहीं आता है तो हाई कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन और नई व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह भी पढ़ें- रतलाम, इंदौर सहित 9 स्टेशनों पर पूछताछ सेवा निजी हाथों में, 20 जुलाई से बदलेगी व्यवस्था, 24 घंटे मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

जिला प्रशासन से मिलकर गाइडलाइन तैयार कर ली गई है। प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। जल्द ही स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी। - प्रशांत पाटणकर, जिला संरक्षक, एएसआई, मांडू