
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मानसून की पहली तेज वर्षा के साथ ही जलभराव और गंदगी की समस्या फिर सामने आ गई है। भोज उत्सव समिति ने इसे न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा, बल्कि देश की इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बताया है। समिति ने प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से तत्काल स्थायी समाधान की मांग की है।
विश्वविख्यात ऐतिहासिक भोजशाला में वर्षा के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परिसर और प्रवेश मार्ग पर भारी जलभराव की स्थिति बन रही है। इससे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ये है कि वर्षा का पानी लंबे समय तक जमा रहने से परिसर में गंदगी और दुर्गंध फैल रही है, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी भी देखी जा रही है।
भोज उत्सव समिति के मुख्य महाप्रबंधक हेमंत दोराया ने बताया कि भोजशाला के भीतर वर्षा के दिनों में जलभराव लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। प्रवेश मार्ग पर पानी जमा होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिस चौकी से लेकर मुख्य प्रवेश द्वार तक कई स्थानों पर गंदगी फैली हुई है, जिससे परिसर की गरिमा भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि भोजशाला देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है। ऐसे में वर्षा के दौरान लगातार होने वाला जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि स्मारक की दीर्घकालीन सुरक्षा के लिए भी चिंता का कारण है। यदि समय रहते जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो नमी और जलभराव का असर ऐतिहासिक संरचना पर भी पड़ सकता है।
समिति ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जिला प्रशासन संयुक्त रुप से भोजशाला परिसर का निरीक्षण कर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही नियमित साफ-सफाई, कीचड़ और कचरे की तत्काल निकासी तथा मानसून के दौरान विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में दर्शन का अवसर मिल सके तथा देश की इस अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित हो सके।