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धार के स्वतंत्रता सेनानी राजा बख्तावर सिंह की धरोहर पर संकट, अमझेरा किले का चौमुखा महल जर्जर, ढहने का खतरा

मालवा की धरती से 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले अमर बलिदानी राजा बख्तावर सिंह की ऐतिहासिक धरोहर आज उप...और पढ़ें

By Rais MohammadEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 11:20:26 AM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 11:20:26 AM (IST)
धार के स्वतंत्रता सेनानी राजा बख्तावर सिंह की धरोहर पर संकट, अमझेरा किले का चौमुखा महल जर्जर, ढहने का खतरा
उपेक्षा की मार झेल रही 1857 के अमर बलिदानी राजा बख्तावर सिंह की ऐतिहासिक धरोहर। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. संरक्षण नहीं हुआ तो मिट जाएगी अंतिम पहचान
  2. अमझेरा महल परिसर में बची अंतिम प्रमुख निशानी चौमुखा महल की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं
  3. शीघ्र संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया, तो यह ऐतिहासिक इमारत कभी भी धराशायी हो सकती है

जितेंद्र चौहान, नईदुनिया न्यूज, अमझेरा (धार)। मालवा की धरती से 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले अमर बलिदानी राजा बख्तावर सिंह की ऐतिहासिक धरोहर आज उपेक्षा की शिकार है। अमझेरा महल परिसर में बची अंतिम प्रमुख निशानी चौमुखा महल की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और पूरी संरचना जर्जर हालत में पहुंच गई है। लगातार हो रही वर्षा के बीच स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि पुरातत्व विभाग ने शीघ्र संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया, तो यह ऐतिहासिक इमारत कभी भी धराशायी हो सकती है।

महल अनगढ़ पत्थरों से निर्मित है और वर्षों से मरम्मत के अभाव में इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास की अमूल्य धरोहर है, जिसे बचाना सरकार और पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी है।


रंग महल अब केवल खंडहर

महल परिसर का रंग महल, जहां कभी राजपरिवार की रानियां निवास करती थीं, आज लगभग पूरी तरह खंडहर में बदल चुका है। टूटी दीवारों के बीच उगे पेड़-पौधे और झाड़ियां इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। समय रहते संरक्षण नहीं होने से यह ऐतिहासिक भवन अपना अस्तित्व लगभग खो चुका है।

देशभक्ति के लिए उठाया था हथियार

इतिहास के जानकारों के अनुसार 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अमझेरा ऐसी रियासत थी जिस पर अंग्रेजों का प्रत्यक्ष दबाव नहीं था। इसके बावजूद युवा राजा बख्तावर सिंह ने किसी निजी स्वार्थ या सत्ता की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि भारत माता को विदेशी दासता से मुक्त कराने के उद्देश्य से अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुना। उनका बलिदान निस्वार्थ राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है।

इतिहास में नहीं मिला उचित स्थान

स्थानीय इतिहास प्रेमियों का मानना है कि राजा बख्तावर सिंह के योगदान को भारतीय इतिहास में वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। बड़ी रियासतों और साम्राज्यों के इतिहास के बीच एक छोटी रियासत के इस वीर शासक का योगदान अपेक्षाकृत उपेक्षित रह गया।

राजा होने के बावजूद दी गई थी सार्वजनिक फांसी

राजा बख्तावर सिंह उन चुनिंदा स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने राजा होने के बावजूद सार्वजनिक रूप से फांसी दी थी। बताया जाता है कि फांसी के बाद उनकी पार्थिव देह को पूरे दिन फंदे पर ही लटकाए रखा गया। यह घटना अंग्रेजी शासन की क्रूरता और उनके संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती है।

जनप्रतिनिधियों की मांग भी नहीं आई काम

पिछले दो दशकों से प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान भी अमझेरा किले के संरक्षण का मुद्दा कई बार उठाया गया। सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर शासन से संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप किला और महल परिसर लगातार खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

शहीद स्मारक निर्माण की उठी मांग

स्थानीय नागरिकों, इतिहासकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अमझेरा में राजा बख्तावर सिंह एवं अन्य अमर बलिदानियों की स्मृति में भव्य शहीद स्मारक का निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही महल और किले का वैज्ञानिक संरक्षण कर इसे ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस गौरवशाली विरासत से परिचित हो सके।

धरोहर बचाने के लिए ये उपाय करना जरूरी

  • चौमुखा महल का तत्काल संरचनात्मक सर्वे कराया जाए।
  • वर्षा के दौरान आपात संरक्षण कार्य शुरू किया जाए।
  • महल और किले का वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार कराया जाए।
  • अमझेरा को ऐतिहासिक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए।
  • बलिदानी राजा बख्तावर सिंह की स्मृति में भव्य स्मारक और संग्रहालय का निर्माण किया जाए।

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