धार में भोजशाला और धारेश्वर के समग्र विकास की तैयारी, 'सरस्वती लोक' के लिए शुरू हुआ तकनीकी सर्वे
ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की भोजशाला तथा धारेश्वर मंदिर परिसर के समग्र विकास की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग और ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 11 Jul 2026 02:38:35 PM (IST)Updated Date: Sat, 11 Jul 2026 02:38:35 PM (IST)
ऐतिहासिक भोजशाला। (फाइल फोटो)HighLights
- 'सरस्वती लोक' और 'धारेश्वर लोक' को एकीकृत धार्मिक एवं पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने पर विचार
- ड्रोन से हुई मैपिंग, जलभराव की समस्या का भी होगा समाधान
- प्रारंभिक चरण में सर्वेक्षण दल ने धारेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की भोजशाला तथा धारेश्वर मंदिर परिसर के समग्र विकास की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से प्रस्तावित 'सरस्वती लोक' परियोजना के लिए विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण कराया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, संरचनात्मक जरूरतों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। परियोजना पूर्ण होने के बाद यहां पर्यटन बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।
ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की मैपिंग की गई
प्रारंभिक चरण में सर्वेक्षण दल ने धारेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण किया, इसके बाद भोजशाला परिसर का तकनीकी सर्वे किया गया। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की मैपिंग की गई, ताकि स्थल की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन हो सके। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
धार धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित योजना में 'सरस्वती लोक' और 'धारेश्वर लोक' को एकीकृत धार्मिक एवं पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। यदि यह योजना साकार होती है तो धार धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और जिले की पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान हासिल कर सकते हैं
सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार होने के बाद विकास कार्यों की विस्तृत परियोजना (डीपीआर) बनाई जाएगी। समयबद्ध तरीके से योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति में भोजशाला और धारेश्वर मंदिर परिसर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान हासिल कर सकते हैं।