
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। वन विभाग के जंगलों में ड्यूटी करने वाले वनरक्षकों की ऐप से हाजिरी का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। ई-एचआरएमएस और वनरक्षक ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर कर्मचारियों की आपत्ति के बाद वन मंडलाधिकारी विजयानंथम टीआर और राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के बीच सोमवार को बैठक हुई।
बैठक में तय किया गया कि भोपाल मुख्यालय से मार्गदर्शन मिलने तक फील्ड स्टाफ की ऐप आधारित उपस्थिति पर रोक रहेगी। इस अवधि में वनरक्षक पहले की तरह रजिस्टर में हाजिरी दर्ज करेंगे। हालांकि, दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ऐप से उपस्थिति व्यवस्था जारी रहेगी।
वनकर्मियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी सामान्य कार्यालय की तरह तय समय तक सीमित नहीं रहती। जंगल में गश्त के दौरान कई बार दिन के साथ रात में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में निश्चित समय पर पंच-इन और पंच-आउट की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। दूरस्थ वन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी बनी रहती है।
इसके अलावा सभी कर्मचारियों को सरकारी मोबाइल और पर्याप्त डेटा सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नेटवर्क या तकनीकी समस्या के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हुई तो इसका असर कर्मचारी के वेतन पर पड़ने की आशंका है।
डीएफओ विजयानंथम टीआर का कहना है कि मुख्यालय से मार्गदर्शन आने तक फील्ड कर्मचारियों की ऐप से उपस्थिति नहीं ली जाएगी। रजिस्टर से हाजिरी की पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। वहीं छुट्टी, एसीआर और एपीएआर से संबंधित प्रक्रिया ऐप के माध्यम से चलती रहेगी।
विभाग का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के कारण वन संरक्षण से जुड़ी गश्त प्रभावित नहीं होगी। वनरक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान विभागीय नियमों के साथ तकनीकी जानकारी भी दी जाती है। वन क्षेत्रों में निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है।
राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र राठौर और जिला अध्यक्ष विनोद राठौर ने कहा कि कर्मचारी तकनीक के विरोध में नहीं हैं।उनकी मांग है कि ऐप लागू करने से पहले प्रशिक्षण, सरकारी मोबाइल, डेटा और नेटवर्क जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।संघ ने वनकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।
पदाधिकारियों के अनुसार अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी रोकने के दौरान वनकर्मियों को जोखिम उठाकर काम करना पड़ता है।ऐसे में डिजिटल हाजिरी के साथ मैदानी परिस्थितियों और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। अब भोपाल मुख्यालय के मार्गदर्शन के बाद ही तय होगा कि फील्ड स्टाफ के लिए ऐप आधारित हाजिरी किस तरह लागू होगी।