गुना का दयारामपुरा आज भी सड़क का मोहताज, एंबुलेंस तक पहुंचना मुश्किल, ग्रामीण बोले- अब आश्वासन नहीं चाहिए
गुना के दयारामपुरा गांव में आजादी के 79 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं बनी। बारिश में कच्चे रास्ते बदहाल हो जाते हैं और एंबुलेंस तक पहुंचना मुश्किल होता ह...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 11:09:20 AM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 11:09:20 AM (IST)
गुना का दयारामपुरा आज भी सड़क का मोहताज। (नईदुनिया)HighLights
- 79 साल बाद भी दयारामपुरा गांव पक्की सड़क से वंचित
- बारिश में कच्चे रास्तों से आवागमन बेहद मुश्किल होता
- आड़ी गैल मार्ग 25 गांवों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता
नईदुनिया प्रतिनिधि, गुना। मधुसूदनगढ़ तहसील की ग्राम पंचायत खैराड़ का दयारामपुरा गांव आजादी के 79 साल बाद भी पक्की सड़क की बाट जोह रहा है। बारिश के मौसम में यहां के कच्चे रास्तों से गुजरना इतना दूभर हो जाता है कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस का पहुंचना भी नामुमकिन हो जाता है। लंबे समय से ग्रामीण सड़क निर्माण की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ कोरे आश्वासन ही नसीब हुए हैं।
जनप्रतिनिधियों के वादे निकले खोखले
- जिले के सुदूर दक्षिणी छोर पर बसे इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व विधायक ममता मीना और मौजूदा विधायक प्रियंका मीना जैसे कद्दावर नेताओं ने किया है।
- इसके बावजूद जमीनी हालात जस के तस हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही वादे हवा हो जाते हैं। केवल दयारामपुरा ही नहीं, बल्कि पास के रामनगर गांव में भी सड़क और पर्याप्त बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा है।
25 गांवों के लिए अहम है 'आड़ी गैल' मार्ग
- दयारामपुरा से होकर जाने वाले इस कच्चे रास्ते को स्थानीय लोग 'आड़ी गैल' कहते हैं। यह मार्ग खैराड़ से शाहपुर तक जाता है। बारिश के बाद यह क्षेत्र के करीब 25 गांवों के लिए सुठालिया बाजार तक पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता (शॉर्टकट) बन जाता है।
- लोगों का कहना है कि अगर इस रास्ते को पक्का कर दिया जाए, तो आवागमन में लगने वाले समय की बचत होगी और कई गांवों की आबादी को भारी सहूलियत मिलेगी।
किसानों और प्रभावितों को भी होगा फायदा
- भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के जिलाध्यक्ष नारायण सिंह चौहान के मुताबिक, इस 'आड़ी गैल' मार्ग को पक्का कराने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि सुठालिया सिंचाई परियोजना से प्रभावित कई किसानों ने इसी रास्ते के आसपास अपने आवास बना लिए हैं।
सड़क बनने से दयारामपुरा सहित आसपास के इन सभी परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और खेती-किसानी के कामों में बड़ी मदद मिलेगी। ग्रामीणों ने बयां की अपनी पीड़ा
- गांव के वरिष्ठ नागरिक भैरोंसिंह लोधी ने बताया कि दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव के समय यहां दो-दो हेलीकॉप्टर उतरे थे, लेकिन दुर्भाग्य है कि इतने सालों बाद भी सड़क की समस्या आज तक नहीं सुलझी।
- धीरजसिंह लोधी के मुताबिक, सभी राजनीतिक दलों ने सिर्फ आश्वासन दिए। अब गांव वालों को वादों की नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के जमीनी काम शुरू होने की दरकार है।
- रामनगर के बंटी सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि दयारामपुरा और रामनगर की दिक्कतों को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द 'आड़ी गैल' को पक्की सड़क में तब्दील किया जाए।
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