200 रुपये लेकर भी 30 लाख कार्ड बाकी: टेंडर में अटका MP का परिवहन विभाग, ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के लिए भटक रहे लोग
MP DL RC Smart Card Tender Delay: मध्य प्रदेश विधानसभा में मामला उठने और सरकार की ओर से जल्द स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 02:18:56 PM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 02:19:23 PM (IST)
HighLights
- ड्राइविंग लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन कार्ड का बैकलाग बढ़ता गया
- 30 जून 2024 को खत्म हो चुका है पुरानी कंपनी का अनुबंध
- नियर फील्ड कम्युनिकेशन आधारित नए कार्ड की तैयारी
वरुण शर्मा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में वाहन रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड के नाम पर लोगों से 200-200 रुपये शुल्क लेने के बावजूद करीब 30 लाख कार्ड का बैकलाग जमा हो गया है। परिवहन विभाग ने कार्ड बनाने वाली एजेंसी का अनुबंध खत्म होने के बाद अब तक नई एजेंसी का टेंडर तय नहीं किया है। नतीजा यह है कि जिन लोगों से स्मार्ट कार्ड के नाम पर शुल्क लिया गया, उन्हें फिलहाल ई-कार्ड देकर काम चलाया जा रहा है।
विधानसभा में मामला उठने और सरकार की ओर से जल्द स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस है। परिवहन विभाग ने हाल में दावा किया था कि नई कंपनी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। विभाग के अनुसार टेंडर होने के बाद लंबित कार्ड जारी किए जाएंगे। हालांकि, 2026 के आठ महीने बीतने के बाद भी नई एजेंसी का टेंडर तय नहीं हो सका है।
200 रुपये शुल्क, बदले में ई-कार्ड
ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन कार्ड के लिए लोगों से 200 रुपये शुल्क लिया जाता है। लेकिन स्मार्ट कार्ड की आपूर्ति बाधित होने के बाद उन्हें मोबाइल पर ई-कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब भौतिक स्मार्ट कार्ड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा तो उसके लिए शुल्क क्यों लिया जा रहा है। यह व्यवस्था वर्ष 2024 से चली आ रही है। विभाग ने स्मार्ट कार्ड का शुल्क समाप्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन उस पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ।
जून 2024 में खत्म हो गया पुरानी कंपनी का काम
गुड़गांव की स्मार्ट चिप कंपनी वर्ष 2003 से परिवहन विभाग के लिए ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड तैयार करती थी। कंपनी और विभाग के बीच भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विवाद भी होते रहे। करीब 88 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला भी सामने आया था। कंपनी को एक बार एक्सटेंशन दिया गया, लेकिन 30 जून 2024 के बाद उसका अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बाद नई एजेंसी के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। कार्ड जारी करने का काम अटकता गया और बैकलाग बढ़कर करीब 30 लाख तक पहुंच गया।
इस बार एनएफसी कार्ड देने की तैयारी
परिवहन विभाग अब सामान्य स्मार्ट कार्ड के बजाय एनएफसी (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) आधारित कार्ड देने की तैयारी कर रहा है। इन कार्ड में रीड-राइट तकनीक होगी, जिससे जरूरत के अनुसार जानकारी अपडेट की जा सकेगी। एनएफसी कार्ड का उपयोग वाहन जांच के दौरान भी किया जा सकेगा। विशेष डिवाइस से कार्ड स्कैन करने पर वाहन मालिक का नाम-पता, ब्लड ग्रुप, वाहन का विवरण, निर्माण और खरीदी का वर्ष तथा टैक्स संबंधी जानकारी जैसी सूचनाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
विधानसभा में उठा मामला, फिर भी नहीं निकला रास्ता
स्मार्ट कार्ड को लेकर विधानसभा में भी सवाल उठ चुके हैं। सरकार की ओर से वर्ष 2026 से स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन वर्ष का आधे से अधिक समय बीतने के बाद भी नई एजेंसी का टेंडर तय नहीं हुआ है। इससे सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग नई व्यवस्था के लिए समय पर टेंडर ही नहीं कर सका तो 30 लाख लोगों से लिया गया कार्ड शुल्क किस आधार पर जारी रखा गया?
स्मार्ट कार्ड को लेकर टेंडर करने की तैयारी की जा रही है। बैकलाग लगभग 30 लाख के आसपास है। टेंडर होने के बाद सभी को कार्ड जारी किए जाएंगे। - किरण शर्मा, उपायुक्त, परिवहन विभाग, मप्र