बिलौआ अवैध खनन मामला: हाईकोर्ट सख्त, SSP व थाना प्रभारी बनाए गए पक्षकार; नए खनिज अधिकारी का मांगा ब्योरा
सुनवाई के दौरान एक अंतरिम आवेदन पर भी सुनवाई हुई। इस आवेदन के माध्यम से संचालक, संचालनालय भू-विज्ञान एवं खनन, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल; पुलिस अधीक्षक, ग...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 09:13:04 AM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 09:13:35 AM (IST)
HighLights
- हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को बनाया पक्षकार
- खनिज अधिकारी की पदस्थापना पर सरकार से जवाब तलब
- 16 खननकर्ताओं की अनुपस्थिति के कारण टली सुनवाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। डबरा क्षेत्र में अवैध खनन और खनिज चोरी से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान खनन अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की पदस्थापना को लेकर राज्य सरकार से महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह स्पष्ट करें कि ग्वालियर के खनन अधिकारी का प्रभार संभालने वाले पंकजध्वज मिश्रा पहले कभी ग्वालियर में पदस्थ रहे हैं या नहीं।
यदि वे ग्वालियर में पदस्थ रहे हैं तो उन्हें कब स्थानांतरित किया गया था, इसकी जानकारी भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए। वहीं खनिज चोरी के सवाल पर एसएसपी धर्मवीर सिंह और बिलौआ थाना प्रभारी इला टंडन को भी पक्षकार बनाया है।
एक अंतरिम आवेदन पर भी हुई सुनवाई हुई
सुनवाई के दौरान एक अंतरिम आवेदन पर भी सुनवाई हुई। इस आवेदन के माध्यम से संचालक, संचालनालय भू-विज्ञान एवं खनन, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल; पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर तथा थाना प्रभारी, थाना बिलौआ, जिला ग्वालियर को मामले में आवश्यक पक्षकार बनाए जाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया। आदेश में कहा गया कि मामले में खनिज की चोरी का प्रश्न शामिल है, इसलिए पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर और थाना बिलौआ के थाना प्रभारी को भी मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया जाना जरूरी है।
अकरम खान द्वारा दायर इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा, शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके शुक्ला और हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीपी सिंह उपस्थित रहे। मामले में जिन 16 निजी खननकर्ताओं के संबंध में पूर्व में स्टे आदेश पारित किया गया था, उनकी ओर से बुधवार को कोई उपस्थित नहीं हुआ। शासन की ओर से बताया गया कि सभी 16 खननकर्ताओं को नोटिस की तामील करा दी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
संचालक भू-विज्ञान एवं खनन को पक्षकार बनाने दी अनुमति
इससे अब मामले में खनन विभाग के साथ पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सीधे न्यायालय के समक्ष आ गई है। कोर्ट ने संचालनालय भू-विज्ञान एवं खनन के संचालक को भी आवश्यक पक्षकार बनाने की अनुमति दी। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने भी संचालक, संचालनालय भू-विज्ञान एवं खनन को प्रतिवादी बनाए जाने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने बुधवार को इस संबंध में दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए आवश्यक संशोधन की अनुमति दे दी।
नए प्रतिवादियों को नोटिस की तैयारी
आवेदन स्वीकार होने के बाद न्यायालय की अनुमति से मामले के पक्षकारों की सूची में आवश्यक संशोधन उसी समय कर दिया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दिन के दौरान प्रक्रिया शुल्क जमा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कोर्ट कार्यालय को नए जोड़े गए प्रतिवादियों के लिए हुमदस्त नोटिस तैयार कर अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके शुक्ला को सौंपने के निर्देश दिए गए, ताकि नोटिस की तामील कराई जा सके।
16 खननकर्ताओं की अनुपस्थिति से फिर टली सुनवाई
बुधवार को मामला खनन अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार के लिए सूचीबद्ध था। लेकिन 16 निजी प्रतिवादियों की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके अलावा कुछ नए प्रतिवादी भी एक दिन पहले ही मामले में जोड़े गए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को एक और अवसर देने का निर्णय लेते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके शुक्ला को विशेष रूप से यह जानकारी जुटाकर प्रस्तुत करने को कहा है कि पंकजध्वज मिश्रा ने ग्वालियर में खनन अधिकारी के रूप में कब-कब कार्य किया और उनका ग्वालियर से स्थानांतरण कब हुआ।