
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश की नई फिल्म पर्यटन नीति को लागू करने के लिए अब जिलों में एडीएम व एसडीएम स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे वे फिल्म शूटिंग की अनुमति को लेकर जरा भी देर न करें। जिलों में कलेक्टर की ओर से इस स्तर के ही अधिकारी को नोडल बनाकर जिम्मेदारी दी जा रही है।
सरकार ने मध्य प्रदेश फिल्म पर्यटन नीति 2025 का उद्देश्य फिल्म निर्माताओं के लिए मध्य प्रदेश को पहली पसंद बनाना तथा फिल्म शूटिंग की समस्त प्रक्रियाओं को सरलीकृत करते हुए प्रदेश में निवेश एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना रखा है।
फिल्म पर्यटन नीति 2025 के प्रमुख प्रावधानों के अंतर्गत प्रदेश में शूटिंग करने के इच्छुक फिल्म निर्माताओं को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रदान करने के लिए वेब पोर्टल फिल्म सेल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से आवेदक को फिल्म शूटिंग की अनुमति एवं अन्य संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी।
इस पोर्टल को भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्मित इंडिया सिने हब के साथ भी एकीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं के लिए फिल्म शूटिंग की प्रक्रिया को सरल एवं सुव्यवस्थित बनाना है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अनुमति की प्रक्रिया को रखा गया है जिससे किसी तरह की परेशानी निर्माताओं को न हो।
वर्तमान में मध्य प्रदेश में फिल्म निर्माता आगे आ रहे हैं। मध्य प्रदेश को वर्ष-2022 में 'द मोस्ट फिल्म-फ्रेंडली' राज्य का पुरस्कार मिल चुका है। अब तक 15 हिंदी फिल्मों, दो तेलुगु फिल्मों और छह वेब सीरीज को 30 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय अनुदान दिया जा चुका है।
प्रमुख फिल्म और वेब सीरीज परियोजनाओं में स्त्री-1 व स्त्री-2, भूल-भुलैया-3, सुई-धागा, लापता लेडीज, द रेलवे मैन, पैडमैन, धड़क-2, पंचायत, कोटा फैक्ट्री, गुल्लक और सिटाडेल आदि शामिल हैं। प्रदेश में मौजूद प्राकृतिक सौंदर्य और अन्य संसाधनों से फिल्म-शूटिंग का क्रेज बढ़ रहा है।
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प्रदेश में खास आकर्षण प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन का अनुभव कराने के साथ-साथ यहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी काम हो रहा है। वन्य जीव गांव में विचरण करते हुए नजर आते हैं। श्योपुर में चीते आसपास के गांवों में तो बाघ भोपाल में शहरी इलाकों में विचरण करते हुए दिखते हैं।
मध्य प्रदेश चीता, बाघ, घड़ियाल, तेंदुआ के साथ वल्चर स्टेट भी है। टाइगर रिजर्व की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थितियों को देखते हुए फिल्म निर्माता कंपनियों को मप्र आकर्षित भी कर रहा है।