ग्वालियर हाई कोर्ट की सख्त कार्रवाई, एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री सड़क निर्माण में PWD अफसरों को नोटिस
कोर्ट ने मुख्य अभियंता वीके अरख और सब इंजीनियर को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 11:45:35 AM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 11:46:02 AM (IST)
बुधवार को सड़क की पैच रिपयेरिंग करता नगर निगम का अमला। सौजन्य: नगर निगमHighLights
- अवमानना कार्रवाई को लेकर मांगा जवाब
- सब इंजीनियर के घर मिले मूल अभिलेख
- निर्माण सामग्री में मानकों का उल्लंघन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की सड़कों के निर्माण और गुणवत्ता में गड़बड़ी को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री तक सड़क निर्माण से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान सामने आया कि निर्माण कार्य का मूल रिकार्ड लोक निर्माण विभाग के प्रभारी सब इंजीनियर दीपक गुप्ता के घर पर रखा गया था।
मुख्य अभियंता से मांगा जवाब
इस पर कोर्ट ने मुख्य अभियंता वीके अरख और सब इंजीनियर को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। दोनों अधिकारियों को दो दिन में जवाब देने का समय दिया गया है।
मूल रिकार्ड घर पर रखने पर नाराजगी
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगल पीठ ने सुनवाई के दौरान रिकार्ड कार्यालय के बजाय घर पर रखे जाने पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सड़क की खराब स्थिति से संबंधित याचिका लंबित है और जांच रिपोर्ट भी पेश हो चुकी है। इसके बावजूद मूल अभिलेख कार्यालय से हटाकर घर पर रखे जाना संदेह पैदा करता है। मुख्य अभियंता ने स्वीकार किया कि रिकार्ड की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया था। सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी की अपनी प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर सवाल किए गए।
मुख्य अभियंता ने स्वीकार किया कि रिपोर्ट के अनुसार सड़क में इस्तेमाल सामग्री की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।
उन्होंने पहले सड़क बनने के बाद 10 दिन तक यातायात बंद नहीं रखने से सड़क खराब होने की दलील दी थी। हालांकि कोर्ट के सवालों पर उन्होंने माना कि सामग्री की कम मात्रा से निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने की बात सामने आती है।
मूल रिकार्ड सीलबंद, कल फिर सुनवाई
मुख्य अभियंता द्वारा पेश किए गए तीन माप पुस्तकों और घर से मिली मूल फाइल को सीलबंद कर सुरक्षित अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। कोर्ट ने अधिकारियों के आचरण पर विचार के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की है। अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्णय दोनों अधिकारियों का जवाब देखने के बाद लिया जाएगा। वहीं एनएचएआई की सड़क संबंधी पिछली ढाई साल की छमाही रिपोर्टों में भी मानकों के अनुरूप स्थिति नहीं होने की बात सामने आई है। एनएचएआई को अपनी रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।