गुमशुदगी मामले में MP पुलिस पर ग्वालियर हाईकोर्ट सख्त: ASP सुजावल जग्गा को जांच से हटाया, SSP करेंगे निगरानी; 27 जुलाई को मांगी रिपोर्ट
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे प्रस्तुत होने वाली प्रत्येक स्टेटस रिपोर्ट एसएसपी के शपथपत्र के साथ दाखिल की जाएगी।
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 02:12:31 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 02:13:12 PM (IST)
एआई से बना चित्र।HighLights
- धीमी जांच पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार
- SIT प्रमुख सुजावल जग्गा जांच से अलग
- सिर्फ मोबाइल लोकेशन नहीं, मैदानी खोज पर जोर
ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। गुमशुदा युवती और एक युवक की तलाश में पुलिस की धीमी जांच पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जांच की निगरानी में बड़ा बदलाव किया है। न्यायालय ने एसआईटी प्रमुख एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुजावल जग्गा को तत्काल प्रभाव से जांच से अलग करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की जांच की व्यक्तिगत निगरानी ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि आगे प्रस्तुत होने वाली प्रत्येक स्टेटस रिपोर्ट एसएसपी के शपथपत्र के साथ दाखिल की जाएगी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिस पिता को अपनी गुमशुदा बेटी का कोई सुराग नहीं है, उसी पर पुलिस बार-बार बेटी का ठिकाना बताने का दबाव बना रही है। अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसी कार्यशैली मध्यप्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। साथ ही पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी जांच व्यवस्था की समीक्षा करने की आवश्यकता बताई।
ईमेल के भरोसे रुकी रही जांच
सरकारी पक्ष ने बताया कि आधार कार्ड से संबंधित लोकेशन की जानकारी के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) को ईमेल भेजा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस दो महीने तक केवल ईमेल के जवाब का इंतजार करती रही और संबंधित कार्यालय जाकर जानकारी जुटाने का प्रयास तक नहीं किया।
मैदानी जांच पर दिया जोर
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच केवल मोबाइल लोकेशन तक सीमित रही। यदि मोबाइल बंद हो जाए तो पूरी जांच ठप पड़ जाती है। अदालत ने निर्देश दिए कि तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ मैदानी स्तर पर भी सक्रिय खोजबीन की जाए। सुनवाई के दौरान एएसपी सुजावल जग्गा ने स्वीकार किया कि उन्हें पूरे मामले को समझने में करीब दो महीने लग गए।
उन्होंने जांच जारी रखने के लिए एक और अवसर देने का आग्रह किया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकार बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी और निराशाजनक रही।मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। तब तक एसएसपी की निगरानी में जांच की प्रगति रिपोर्ट शपथपत्र सहित हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।