झमाझम बारिश से राहत और आफत: ग्वालियर में पारा 6°C गिरा, अगले 3 दिन वर्षा के आसार; जलभराव से बढ़ीं मुश्किलें
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आगामी 72 घंटे तक अंचल में वर्षा का दौर जारी रहेगा। शुक्रवार को पूरे जिले में समान रूप से वर्षा होने की संभावना है। हालां...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 12:37:10 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 12:37:51 PM (IST)
नगर निगम मुख्यालय मार्ग पर ही जलभराव हो गया। नईदुनियाHighLights
- कभी रिमझिम तो कभी झमाझम
- शहर में हुई देर रात 11.30 बजे तक 41.2 मिमी वर्षा
- फसलों को मिला संजीवनी रूपी नया जीवन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर सहित अंचल में गुरुवार को मेघ मेहरबान हो गए। दिन में कभी रिमझिम तो कभी झमाझम वर्षा हुई। 24 घंटे में शहर में 41.2 मिमी पानी बरस गया। वर्षा का असर यह था कि तापमान में शाम तक करीब छह डिसे की गिरावट आ गई। जिससे अंचल में उमस व गर्मी पूरी तरह से गायब हो गई। वर्षा की वजह से न केवल शहर में विभिन्न जगहों पर जलभराव की समस्या हो गई, बल्कि कई निर्माणाधीन सड़कों पर कीचड़ की वजह से लोगों को आने जाने में खासी दिक्कत हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आगामी 72 घंटे तक अंचल में वर्षा का दौर जारी रहेगा। शुक्रवार को पूरे जिले में समान रूप से वर्षा होने की संभावना है। हालांकि भारी वर्षा नहीं होगी।
यहां बता दें कि मंगलवार व बुधवार को शहर के आसमान पर बादल तो रहे, लेकिन वर्षा न के बराबर हुई। लेकिन बुधवार रात को भी करीब एक मिमी वर्षा हुई। लेकिन गुरुवार दिन में 41.2 मिमी वर्षा हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक वर्तमान में मानसूनी ट्रफ प्रदेश के ऊपर से जा रही है और ग्वालियर के पास से गुजर रही है। साथ ही राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा पर चक्रवातीय प्रसार बना हुआ है। इस वजह से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होने का अनुमान है।
सुबह से ही बादल छाने के बाद दोपहर में तेज वर्षा होने लगी। नईदुनिया
स्वाति नक्षत्र में पानी बरसना शुभ
गुरुवार को स्वाति नक्षत्र था और यह नक्षत्र पांच बजे तक रहा। जनश्रुति के अनुसार स्वाति नक्षत्र में बरसने वाला पानी काफी शुभ माना जाता है। चूंकि आज स्वाति नक्षत्र में पानी बरसा है। ऐसे में ज्योतिषाचार्यों को मानना है कि आगामी दिनों में भी अंचल पर मानसून मेहरबान रहेगा।
जगह-जगह जलभराव, लगा जाम
वर्षा ने गर्मी व उमस से बेशक राहत दी हो, लेकिन शहर में कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बन गई। चाहे सिटी सेंटर जैसा पास इलाका हो या फिर शहर की कोई पिछड़ी बस्ती। शहर में गोले का मंदिर, पड़ाव चौराहा, निगम मुख्यालय के सामने बाल भवन रोड, पड़ाव आरओबी, स्टेशन के सामने शास्त्री चौराहा, अचलेश्वर चौराहा आदि प्रमुख जगहें थी, जहां पर सड़कों पर पानी भर गया। इसके साथ ही शहर की झांसी रोड पर एक लेन के कच्चा होने से वहां पर वाहन फंसते हुए नजर आए। जिससे लोगों को खासी परेशानी हुई।
पिछले साल इस समय तक तीन गुना अधिक हुई थी वर्षा
इस बार जुलाई माह में मानसून रूठा रहा है। वर्षा हुई भी तो उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। पिछले साल 23 जुलाई तक शहर में 754 मिमी वर्षा हुई थी। जबकि इस बार 23 जुलाई तक 175.4 मिमी वर्षा हुई है। यानि इस बार वर्षा पिछले साल की तुलना में काफी कम हुआ है। हालांकि जुलाई महीने का कोटा 224 मिमी वर्षा का है। अभी भी कोटा पूरा होने में 50 मिमी वर्षा कम है। 24 घंटे में सर्वाधिक वर्षा 12 जुलाई 2015 में 190.6 मिमी हुई थी। सर्वाधिक कुल मासिक वर्षा जुलाई 2025 को 797.7 मिमी दर्ज की गई थी।
फसलों के लिए अमृत साबित हुआ पानी
रात से हो रही वर्षा से अंचल की फसलों को नया जीवन तो मिला ही है। इस वर्षा से धान की रोपाई में तेजी आ गई है। साथ ही बाजरा, ज्वार, तिल सहित उड़द मूंग आदि की जो उपज आई थी, उसे नया जीवन मिला है। कृषि विज्ञानियों के मुताबिक इस वर्षा से न केवल खरीफ का रकबा बढ़ेगा, बल्कि फसल भी अच्छी होगी।