
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सरकारी स्कूलों में अब शिक्षक न केवल पहुंच रहे हैं, बल्कि पूरे समय तक अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा रहे हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को जिले के स्कूलों में 97 प्रतिशत शिक्षक व 99 प्रतिशत स्कूल इंचार्ज पहुंचे और कार्य किया। ऐसे में स्कूलों में विभाग के अफसरों ने स्कूलों में पढ़ाई के स्तर के सुधरने की संभावना जताई है।
हालांकि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में इस बार अतिथि शिक्षक एक प्रतिशत पीछे हैं। 96 प्रतिशत अतिथि शिक्षक ही अपनी ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। यहां बता दें कि शिक्षा विभाग ने जुलाई 2025 से शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य की थी। लेकिन अगस्त-सितंबर तक शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 50 प्रतिशत से भी नीचे थी।
हालांकि बाद में विभाग द्वारा वेतन रोकने की कार्रवाई की गई तो पिछले सत्र में 80 प्रतिशत तक ई-अटेंडेंस पहुंच गई थी। लेकिन इस बार लोक शिक्षण विभाग ने आदेश जारी कर एक जुलाई से ई-अटेंडेंस लगाना न केवल अनिवार्य किया, बल्कि जिस दिन ई-अटेंडेंस नहीं लगेगी, उस दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया।
साथ ही यदि संकुल केंद्र या ब्लॉक शिक्षा कार्यालय स्तर पर वेतन पत्रक बनाते समय यदि बीईओ या प्राचार्य ई-अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों का वेतन बनाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। ऐसे में अब जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति का प्रतिशत 97 पहुंच गया है।
जिले में जो तीन प्रतिशत शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, उनमें विभिन्न कामों से जाने शिक्षक, अवकाश पर रहने वाले शिक्षक हैं। मंगलवार को केवल 180 शिक्षक ही जिले में ऐसे थे, जो किसी शासकीय काम या छुट्टी पर नहीं थे और उन्होंने ई-अटेंडेंस नहीं लगाई।
पहले जहां स्कूल इंचार्जों के ई-अटेंडेंस का प्रतिशत 75 से 80 प्रतिशत के बीच रहता था, वह अब 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बचे एक प्रतिशत में ट्रेनिंग व अवकाश पर रहने वाले इंचार्ज 118 हैं और बिना किसी काम के लॉगिन न करने वाले केवल 12 इंचार्ज हैं।
ई-अटेंडेंस लगाने के मामले में इस बार अतिथि शिक्षक पिछड़ रहे हैं। पिछले साल अतिथि शिक्षक नियमित शिक्षकों से अधिक यानी 90 प्रतिशत से ऊपर ई-अटेंडेंस लगा रहे थे। इस बार इनका प्रतिशत तो बढ़ा है, लेकिन नियमित शिक्षकों से पीछे है। मंगलवार को जिले में 96 प्रतिशत अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस लगाई है जो नियमित शिक्षकों से एक प्रतिशत कम है।
पहले स्कूल में पहुंचकर शिक्षकों को ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य था। लेकिन पिछली 6 जुलाई से संस्था से ही लॉग आउट करना अनिवार्य किया गया है। पहले शिक्षक स्कूल में ई-अटेंडेंस लगाकर चले जाते थे और लॉग आउट कहीं से भी कर देते थे। लेकिन अब उन्हें संस्था से ही लॉग आउट करना होगा।
यदि वे संस्था से दो सौ मीटर दूर से भी लॉग आउट करते हैं तो ऐप उन्हें आउट नहीं करेगा और उनकी अनुपस्थिति दिखा देगा। ऐसे में अब शिक्षकों को स्कूलों में छह से सात घंटे देना ही पड़ रहे हैं।
ई-अटेंडेंस के मामले में जिले के शिक्षकों का रिकार्ड इस बार अच्छा है। 97से 98 प्रतिशत शिक्षक आनलाइन उपस्थिति दे रहे हैं। ऐसे में जब शिक्षक स्कूल में रहेंगे तो छात्रों को पढ़ाएंगे, इससे निश्चित तौर पर शैक्षणिक स्तर में सुधार आएगा। स्वीटी मंगल, जिला शिक्षा अधिकारी