
अनिल तोमर, नईदुनिया, ग्वालियर। खाद्य तेलों में आई महंगाई ने रसोई ही नहीं, घर के बजट को बिगाड़ दिया है। बाजार के रुख को समझें तो आगामी समय में खाद्य तेल की कीमतों में और तेजी आएगी। जिससे घरों का बजट और लड़खड़ा सकता है। चूंकि अंचल में लोग सबसे अधिक सरसों के तेल का उपयोग खाने में करते हैं और सरसों का तेल ही वर्तमान में 190 से 200 रुपये के बीच में चल रहा है।
यदि लोग विकल्प के तौर पर रिफाइंड आयल, राइसब्रान, पाम आयल का भी उपयोग करना चाहें तो यह सभी दूसरे देशों से आयात होते हैं और इनकी आपूर्ति युद्ध की वजह से नहीं हो पा रही है।
ऐसे में इन तेलों की दरें भी बढ़ गई हैं। जहां तक सरसों के तेल की बात है तो विदेशी तेल के कम आने व सरसों की फसल कम होने से यह सबसे महंगा हो गया है। कारोबारियों की माने तो सरसों का तेल 220 से 230 रुपये प्रति किलो तक जा सकता है। वर्तमान में सरसों भी महंगी यानि आठ हजार क्विंटल के करीब बिक रही है।
ग्वालियर चंबल के जिलो में हर साल 13-14 लाख मिट्रिक टन सरसों का उत्पादन होता है। लेकिन 2025-26 में सरसों की फसल का उत्पादन अंचल में 9.5 लाख मीट्रिक टन हुआ है। साथ ही सरसों की क्वालिटी भी हल्की रही। इसलिए सरसों तेल का उत्पादन कम हो रहा है और तेजी आ रही है।
वर्तमान में सरसों का भाव आठ हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है। यानि समर्थन मूल्य से करीब 1800 रुपये अधिक पर बिक रही है। ऐसे में किसानों व व्यापारियों ने सरसों की फसल को इस आस में दबा लिया है कि जब और भाव बढ़ेंगे तो वे सरसों को बेचेंगे। जिससे अच्छे दाम मिलेंगे, इसलिए सरसों का तेल महंगा हो रहा है।
लोग सरसों के तेल के विकल्प के रूप में विदेशी सस्ते तेल रिफाइंड, पाम आयल आदि का उपयोग भी करते हैं। लेकिन ईरान-अमेरिका के युद्ध की वजह से यह तेल भी कम ही आ पा रहा है। साथ ही इस तेल के भी भाव 165 से 170 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। इन तेलों की कमी की वजह से भी सरसों के तेल की मांग अधिक बढ़ गई है।
ग्वालियर-चंबल के भिंड, मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर आदि जिलों का प्रदेश भर के कुल सरसों के उत्पादन में 60 से 70 प्रतिशत का योगदान रहता है। लेकिन इस बार सरसों के उत्पादन कम होने से अंचल में लगी आयल मिलें भी बंद हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले मुरैना में 28 के करीब सरसों तेल मिल हैं। इनमें से 8 से 10 मिलें वर्तमान में सरसों न मिलने से बंद हैं। इस बात का असर भी तेल के दामों पर आ रहा है।
सरसों व सरसों के तेल के ब्रोकर रवि गुप्ता की माने तो सरसों के उत्पादन कम होने व विदेशी तेल के न आने की वजह से सरसों व तेल के दाम बढ़ रहे हैं। यदि युद्ध खत्म नहीं हुआ और विदेशी तेल नहीं आया तो सरसों के तेल के दाम 220 से 230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं।
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तेल का प्रकार थोक रेट खेरीज रेट
सरसों तेल 168 190 से 200
रिफाइंड ऑयल 150 170 से 175
राइस ब्रान 145 165 से 170
पाम आयल 145 165 से 170
नोट: दरें रुपये प्रति किलो में
सरसों ही नहीं, अन्य सभी तेलों में अलग-अलग वजहों से तेजी है। आगामी समय में भी इनकी दरों में इजाफा होने की पूरी संभावना है। सरसों का उत्पादन कम हुआ है और वर्तमान में विदेशी तेल की आवक न होने से अधिक दरें बढ़ी हैं और आगामी समय में और बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। अनिल पंजवानी, तेल कारोबारी, दाल बाजार।