जीवाजी विवि में कुत्तों को खाना खिलाने पर विवाद, मेनका गांधी ने जताई आपत्ति, प्रतिबंध को बताया गैर-कानूनी
जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर लगाए गए प्रतिबंध ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 25 Feb 2026 10:33:52 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Feb 2026 10:33:52 PM (IST)
Jiwaji University GwaliorHighLights
- जीवाजी विवि में कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक के फैसले पर विवाद बढ़ा
- मेनका गांधी ने विवि प्रबंधन से की बात, संवेदनशील रुख अपनाने की सलाह
- प्रशासन सुरक्षा को लेकर चिंतित, पशु प्रेमी बोले- भूखे रहने से बढ़ेगा हमला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों को खाना, बिस्कुट या अन्य खाद्य सामग्री खिलाने पर लगाए गए प्रतिबंध ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में परिसर में साइन बोर्ड लगाकर कुत्तों को भोजन कराने पर रोक की सूचना जारी की गई थी। इसके बाद पूर्व सांसद और पशु अधिकारों की मुखर आवाज मेनका गांधी ने इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई है।
वैकल्पिक व्यवस्था के बिना प्रतिबंध को बताया गलत
सूत्रों के अनुसार मेनका गांधी की ओर से विश्वविद्यालय प्रबंधन को ई-मेल और फोन कॉल के माध्यम से संपर्क किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि परिसर में कुत्तों के लिए कोई समुचित शेल्टर या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, तो उनके भोजन पर प्रतिबंध लगाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। उन्होंने पशु क्रूरता निवारण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
कुत्ते काटने की घटनाओं के बाद प्रशासन ने लिया था निर्णय
दरअसल, लगभग 15 दिन पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में कुत्तों द्वारा कुछ लोगों को काटे जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद सुरक्षा और विद्यार्थियों की चिंता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध का उद्देश्य किसी पशु के प्रति कठोरता नहीं, बल्कि परिसर में आने-जाने वाले छात्रों, कर्मचारियों और आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भोजन न मिलने से और अधिक आक्रामक हो सकते हैं कुत्ते
हालांकि, पशु प्रेमी समूहों का तर्क है कि भोजन पर रोक लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कुत्ते और अधिक आक्रामक हो सकते हैं। उनका सुझाव है कि नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित फीडिंग जोन जैसी व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी साबित होंगी। अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन पर संतुलित समाधान खोजने का दबाव बढ़ गया है।