
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चार दशक पुराने सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर बुधवार को ग्वालियर कोर्ट में समझौता होने जा रहा है। इस बहुचर्चित पारिवारिक विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ- राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए आपसी समझौते की औपचारिक प्रक्रिया न्यायालय में पूरी की जाएगी। इसके लिए दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
बता दें कि न्यायालय के निर्देश के बाद सभी पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हुए हैं। समझौते का आवेदन ग्वालियर जिला कोर्ट में प्रस्तुत किया जा चुका है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनों के भीतर पूरे विवाद का समाधान कर उसकी कंप्लायंस रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करने को कहा था। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है।
वर्ष 1988-89 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता कांग्रेस की केंद्र सरकार में मंत्री रहे माधवराव सिंधिया और उनकी तीनों बहनों के बीच संपत्ति का यह विवाद शुरू हुआ था। वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया की प्लेन दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद यह विवाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ के बीच हो गया। वर्ष 2010 में न्यायालय में इस मामले को नया नंबर मिला।
इस मामले में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटियों- ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने जिला न्यायालय में दावा दायर करते हुए कहा था कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी समान वैधानिक अधिकार है और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने अधिकार को लेकर अलग वाद दायर किया।
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दोनों प्रकरण लंबे समय तक जिला न्यायालय में विचाराधीन रहे। करीब 16 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के दौरान मामला आगे चलकर वर्ष 2017 में हाई कोर्ट पहुंचा, जहां इसे सिविल रिवीजन के रूप में दर्ज किया गया। अब दोनों पक्षों के बीच सहमति से शांतिपूर्ण समाधान की राह लगभग साफ हो गई है।