
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साइबर अपराध की जांच के चलते फ्रीज किए गए एक बैंक खाते को अनफ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, खाते में विवादित 75 हजार रुपए की राशि को अलग से सावधि जमा (एफडी) में रखा जाएगा। पुलिस को तीन महीने के भीतर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से इस राशि के संबंध में आवश्यक आदेश प्राप्त करने होंगे।
ऐसा नहीं होने पर याचिकाकर्ता को पुलिस एजेंसी को सूचना देकर यह राशि भी निकालने की अनुमति मिल सकेगी। न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने शिव कुमार अग्निहोत्री बनाम पुलिस उपायुक्त एवं अन्य मामले में सोमवार को यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता शिव कुमार अग्निहोत्री ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर अपने एसबीआई बैंक खाते पर लगाए गए साइबर क्राइम डेबिट फ्रीज को हटाने की मांग की थी।
अदालत में पूर्व निर्णय का दिया हवाला
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके बैंक खाते को साइबर अपराध से जुड़ी किसी शिकायत के आधार पर फ्रीज कर दिया गया है। उसने अदालत से खाते को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति देने अथवा कम से कम 75 हजार रुपए की विवादित राशि को छोड़कर शेष खाते को चालू करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला दिया।
इस मामले में साइबर अपराध एजेंसियों के निर्देश पर बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से संबंधित समान परिस्थितियों पर हाईकोर्ट पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। पूर्व मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि किसी बैंक खाते में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित बताई गई कोई विशेष राशि विवादित है, तो पूरी बैंकिंग गतिविधि को अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में विवादित राशि को अलग कर एफडी में रखा जा सकता है, जबकि खाते के संचालन की अनुमति दी जा सकती है।
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पुलिस को लेने होंगे न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश
मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने माना कि पूर्व निर्णय के सिद्धांत इस प्रकरण में भी लागू होते हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि पुलिस या साइबर अपराध एजेंसी द्वारा विवादित बताई गई राशि को बैंक अलग से सावधि जमा में रखे। इस राशि को तभी निकाला या समाप्त किया जा सकेगा, जब सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से आदेश पारित किया जाएगा। अदालत ने पुलिस एजेंसी को निर्देश दिए कि वह संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत तीन महीने के भीतर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवश्यक आदेश प्राप्त करे।
यदि निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं किया जाता है तो एफडी में रखी गई राशि को भी याचिकाकर्ता को पुलिस एजेंसी को सूचना देकर निकालने की अनुमति होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए भारतीय स्टेट बैंक में याचिकाकर्ता शिव कुमार अग्निहोत्री के खाते से डेबिट फ्रीज हटाने का आदेश दिया। इसके साथ ही याचिका का निराकरण कर दिया गया।