

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित की श्रेणी में नीट में लाभ लेने के लिए दादा को स्वतंत्रता सेनानी घोषित करने और प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर दायर याचिका हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर दतिया कलेक्टर पहले ही निर्णय दे चुके हैं।
यदि याचिकाकर्ता इस निर्णय से असंतुष्ट है तो उसे कलेक्टर के आदेश को अलग से चुनौती देनी होगी। याचिकाकर्ता आमिर उल्लाह खान की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि उनके दादा को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में दर्ज किया जाए और उन्हें स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जारी किया जाए, ताकि वे नीट में स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी का लाभ ले सकें।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि दतिया कलेक्टर ने 11 अगस्त 2026 को ही स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र जारी करने के आवेदन को खारिज कर दिया है।
कलेक्टर के आदेश की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की गई, जिसे अभिलेख पर ले लिया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कलेक्टर के आदेश में दर्ज निष्कर्षों पर आपत्ति जताते हुए उसे चुनौती देने का प्रयास किया। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा याचिका में कलेक्टर के आदेश की वैधता और उसके गुण-दोष पर विचार नहीं किया जा सकता। इसके लिए याचिकाकर्ता को विधिवत नई याचिका दायर कर आदेश को चुनौती देनी होगी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला इस खंडपीठ के समक्ष इसलिए आया था क्योंकि याचिकाकर्ता नीट में स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी का लाभ लेना चाहता था। कलेक्टर के आदेश की वैधता को चुनौती देने का मामला सामान्य तौर पर एकल पीठ के समक्ष विचारणीय होगा।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को कलेक्टर के 11 अगस्त के आदेश को उचित प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की स्वतंत्रता देते हुए वर्तमान याचिका खारिज कर दी।
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