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ग्वालियर में मानसून मेहरबान: धान रोपाई का रकबा 36 हजार हेक्टेयर पहुंचा, बारिश से अन्य खरीफ फसलों की बुआई पर लगा ब्रेक

यदि मानसून की यह अनुकूल स्थिति आगामी सात से आठ दिनों तक इसी तरह बनी रहती है, तो विभाग अपने निर्धारित 95 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर ल...और पढ़ें

By Anil TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 12:46:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 12:47:16 PM (IST)
ग्वालियर में मानसून मेहरबान: धान रोपाई का रकबा 36 हजार हेक्टेयर पहुंचा, बारिश से अन्य खरीफ फसलों की बुआई पर लगा ब्रेक
खेत में धान की रोपाई करते किसान और आंकड़े। नईदुनिया

HighLights

  1. हफ्ते भर में 95 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य हासिल होने की संभावना
  2. अत्यधिक नमी के कारण बाजरा, ज्वार और तिल की बुआई फिलहाल रुकी
  3. कम बोवनी से अंचल में मंडराया पशुओं के चारे का संकट

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल में मानसून के मेहरबान होते ही कृषि गतिविधियों में जबरदस्त तेज़ी आ गई है। वर्षा की फुहारें पड़ते ही जिले में धान रोपाई का रकबा अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। वर्षा का दौर शुरू होने से पहले तक अंचल में केवल 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपाई हो सकी थी। वहीं, पिछले चार से पांच दिनों में हुई वर्षा के बाद यह आंकड़ा छलांग लगाकर 36 हजार हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है। किसान अब दिन-रात खेतों में जल-भराव के बीच धान की पौध लगाने में जुटे हुए हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले में इस बार कुल 95 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून की यह अनुकूल स्थिति आगामी सात से आठ दिनों तक इसी तरह बनी रहती है, तो विभाग अपने निर्धारित 95 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगा। पर्याप्त वर्षा होने से न केवल भू-जल स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि धान की फसल के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो गई है।


बुआई पर फिलहाल ब्रेक

जहां एक ओर वर्षा का यह मौसम धान की खेती के लिए वरदान साबित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अन्य खरीफ फसलों की बुआई पर फिलहाल अस्थायी रोक लग गई है। खेतों में अत्यधिक नमी होने से किसान बाजरा, ज्वार, मूंग और तिल जैसी फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इन फसलों के बीजों को अंकुरण के लिए सामान्य नमी की आवश्यकता होती है। जैसे ही खेतों से अतिरिक्त पानी सूखेगा और धूप खिलेगी, किसान इन फसलों की बुआई का काम भी पुनः शुरू कर सकेंगे।

इस बार भी हो सकती है चारे की कमी

अंचल में बाजरा, ज्वार व मक्के की फसल कटने के बाद इसके अवशेष पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किया जाता है। लेकिन जिस तरह से मौसम चल रहा है, उससे लोग बाजरा व ज्वार की फसल कम बो पाएंगे। ऐेसे में अंचल में चारे की कमी हो सकती है।