
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कलेक्ट्रेट के ठीक सामने विद्या विहार कॉलोनी में हाई कोर्ट की रोक के बाद भी गुपचुप रजिस्ट्री किए जाने के मामले सामने आए हैं। जिला प्रशासन को इस मामले में शिकायत पहुंचने के बाद अब झांसी रोड एसडीएम अतुल सिंह की ओर से जिला पंजीयक,पंजीयन विभाग और नगर निगम को पत्र जारी किया गया है।
पत्र में महलगांव स्थित विद्या विहार कॉलोनी के 60 से ज्यादा सर्वे नंबरों की सूची भी शामिल की गई है और लिखा गया है इस मामले में सिविल कोर्ट की डिक्री को हाई कोर्ट की ओर से स्टे किया गया है रोक के बाद भी रजिस्ट्री हो रही हैं।
पत्र में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर द्वारा जारी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस पत्र के बाद अब विवादित सर्वे नंबरों की जमीनों की रजिस्ट्री, खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश शासन बनाम नारायणी देवी व अन्य (एसए 3028/2018) से जुड़ा हुआ है। असल में, इस विवाद को लेकर पूर्व में 10वें व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 ग्वालियर द्वारा 7 फरवरी 2003 को (सिविल सूट नंबर 326-ए/1992) और बाद में जिला न्यायाधीश ग्वालियर द्वारा 12 सितंबर 2018 को (नियमित सिविल अपील संख्या 34/2004) आदेश पारित किए गए थे।
इन फैसलों के खिलाफ मध्य प्रदेश शासन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने अपील को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए 15 मार्च 2019 को शासन के पक्ष में एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश जारी किया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि आगामी आदेश तक निचले न्यायालयों के फैसलों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
एसडीएम झांसीरोड द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों और समाचार पत्रों की खबरों से यह लगातार जानकारी सामने आ रही थी कि भू-माफिया और कतिपय तत्व इस विवादित सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कार्य करा रहे हैं। इसके साथ ही आम जनता को गुमराह करके इन जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और प्लॉटिंग की गतिविधियां भी धड़ल्ले से संचालित की जा रही थीं। इसी कारण प्रशासन की ओर से यह कड़ा पत्र लिखा गया है।
सर्वे क्रमांक 736 (0.387 हे.), 737 (1.160 हे.), 742 (1.923 हे.), 743 (4.850 हे.), 744 (0.251 हे.), 746 (0.763 हे.), 747 (0.449 हे.), 748 (0.94 हे.), 752 (3.250 हे.), 760 (1.540 हे.), 769 (4.390 हे.) तथा 783 (3.617 हे.) शामिल हैं। सर्वे क्रमांक 786, 801, 805, 810, 813 (2.602 हे.), 815 (2.456 हे.), 818, 819, 825 (1.867 हे.), 826, 827 और 836 की भूमि पर भी रोक है। इसके अतिरिक्त सर्वे क्रमांक 857 (2.236 हे.), 942 (2.738 हे.), 997 (1.066 हे.) तथा 1045 (1.986 हैक्टेयर) समेत कुल मिलाकर लगभग 60 से अधिक सर्वे नंबरों की भूमि को इस दायरे में रखा गया है।
इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर ग्वालियर को सूचनार्थ भेजने के साथ-साथ आयुक्त नगर पालिक निगम ग्वालियर और संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश ग्वालियर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है। नगर निगम आयुक्त से विशेष अनुरोध किया गया है कि उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय आने तक इन विवादित सर्वे क्रमांकों पर किसी भी प्रकार के भवन निर्माण की अनुमति या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों संबंधी अनुज्ञा जारी न की जाए। यदि कोई आवेदन आता भी है, तो पहले कानून के दायरे में उसकी गहनता से जांच की जाए।
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विद्या विहार कॉलोनी के सर्वे नंबरों पर रजिस्ट्री न करने व निर्माण अनुमति न दिये जाने को लेकर पंजीयन विभाग व नगर निगम को पत्र लिखा गया है। इस भूमि पर हाई कोर्ट ने स्थगन जारी किया है और यहां रजिस्ट्री व निर्माण की शिकायतें मिलीं हैं। - अतुल सिंह, एसडीएम, झांसी रोड