
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिक्षा विभाग ने बेशक अपनी ट्रांसफर पालिसी जारी कर दी हो, लेकिन विभिन्न स्कूलों में अतिशेष शिक्षक फिर से बच जाएंगे। यानि इनके ट्रांसफर नहीं हो पाएंगे। इसकी वजह यह है कि ट्रांसफर पालिसी में इन शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए कोई नियम का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि विभाग के अफसरों का कहना है कि अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्त करण ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी। लेकिन यह बात विभाग ने पिछले साल भी कही थी, लेकिन इसके बाद युक्तियुक्त प्रक्रिया हो ही नहीं पाई।
जिले में तीन सौ से अधिक अतिशेष शिक्षक हैं। इनमें सबसे अधिक विज्ञान विषय के हैं। उन शिक्षकों को कहा जाता है जो किसी सरकारी स्कूल में स्वीकृत पदों या छात्र-शिक्षक अनुपात की तुलना में आवश्यकता से अधिक हो जाते हैं। अतिशेष की समस्या सबसे अधिक शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में हैं। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक किसी न किसी तरह अपना ट्रांसफर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में करा लाते हैं, बेशक वहां पर पद हो या न हों। इससे समस्या यह होती है कि ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो जाती है।
बेशक शिक्षक विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी जारी कर दी हो और पोर्टल पर आठ जून से शिक्षकों ने आवेदन करना शुरू कर दिया हो। विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अभी तक भोपाल स्तर से यह तय नहीं किया गया है कि इसमें जिला शिक्षा अधिकारी व संयुक्त संचालक शिक्षा की भूमिका क्या होगी। या फिर ट्रांसफर पोर्टल पर आवेदन करने के बाद सीधे भोपाल से ही होंगे।
अपने मन पसंद स्थान पर ट्रांसफर कराने की मन बनाए शिक्षक जिला शिक्षा कार्यालय से लेकर भोपाल तक व प्रभारी मंत्री तक के यहां के रास्ते तलाश रहे हैं। जिससे कि आवेदन करने के बाद उनके ट्रांसफर हो सकें। ऐसे में ये शिक्षक आवेदन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
- शिक्षक पोर्टल पर सीधे ट्रांसफर के लिए आवेदन कर रहे हैं। कितने शिक्षकों ने आवेदन किया है, यह डाटा नहीं आता है। साथ ही आवेदन की तिथि खत्म् होने के बाद लोकशिक्षण विभाग क्या निर्णय लेता है। उसी आधार पर प्रक्रिया पूरी होगी।
पुष्पा ढोढी, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी