• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • ग्वालियर

MP Patwari Bharti में हाईकोर्ट से राज्य सरकार को राहत, डिवीजन बेंच ने नियुक्ति का आदेश पलटा

Gwalior High Court: सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच का आदेश निरस्त कर दिया।

By Vikram Singh TomarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 09:01:51 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 09:06:30 AM (IST)
MP Patwari Bharti में हाईकोर्ट से राज्य सरकार को राहत, डिवीजन बेंच ने नियुक्ति का आदेश पलटा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का बड़ा फैसला। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. सिर्फ डिप्लोमा या मार्कशीट होने से पात्रता साबित नहीं होती
  2. पाठ्यक्रम और डिस्टेंस मोड की मान्यता भी जरूरी
  3. कोर्ट ने - शेर सिंह रावत की रिट याचिका खारिज कर दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पटवारी भर्ती से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक अभ्यर्थी को पटवारी पद पर नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ विश्वविद्यालय द्वारा डिप्लोमा या मार्कशीट जारी कर देने से भर्ती के लिए आवश्यक पात्रता सिद्ध नहीं होती।

यह भी साबित करना होगा कि संबंधित संस्थान, पाठ्यक्रम और डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से संचालित कोर्स को नियमानुसार मान्यता प्राप्त थी। मामले में राज्य सरकार ने 10 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शेर सिंह रावत को पटवारी पद पर नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए थे।


सरकार का कहना था कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थान का कंप्यूटर एप्लीकेशन डिप्लोमा अनिवार्य था, जबकि शेर सिंह रावत का डिप्लोमा शिवपुरी के एक डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर से प्राप्त था, जिसे उस माध्यम से संचालित करने की स्वीकृति नहीं थी।

पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त हो

वहीं, शेर सिंह रावत ने तर्क दिया कि उन्होंने चयन परीक्षा पास कर ओबीसी वर्ग में 145वीं रैंक हासिल की थी तथा गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा जारी उनका डिप्लोमा कभी निरस्त नहीं किया गया। डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती प्राधिकारी का दायित्व केवल अंकपत्र देखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि संबंधित पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त हो।

याचिका खारिज कर दी

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मेरिट या वेटिंग सूची में स्थान मिलने मात्र से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता और अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति के आधार पर समानता का दावा भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील मंजूर करते हुए सिंगल बेंच का आदेश निरस्त कर दिया, 4 अगस्त 2016 का मूल आदेश बहाल किया और शेर सिंह रावत की रिट याचिका खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें- एमपी के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, GPF और भविष्य निधि पर मिलेगा 7.1% ब्याज, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश