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220 केवी ग्वालियर-दतिया बिजली लाइन के 10 टावरों पर अवैध खनन की वजह से गिरने खतरा

ग्वालियर-दतिया 220 केवी अति उच्चदाब विद्युत लाइन के करीब 10 ट्रांसमिशन टावर अवैध खनन के कारण संकट में हैं।

By Anoop BhargavEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 15 Aug 2026 09:13:50 AM (IST)Updated Date: Sat, 15 Aug 2026 09:37:25 AM (IST)
220 केवी ग्वालियर-दतिया बिजली लाइन के 10 टावरों पर अवैध खनन की वजह से गिरने खतरा
उत्खनन से टावर के आस-पास हुआ मिट्टी का क्षरण।

HighLights

  1. नींव कमजोर होने से कभी भी हो सकता है हादसा
  2. बिजली आपूर्ति पर मंडराया संकट
  3. अवैध खनन से टावरों की नींव कमजोर हो रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-दतिया 220 केवी अति उच्चदाब (ईएचटी) विद्युत लाइन के लगभग 10 ट्रांसमिशन टावर अवैध खनन और मिट्टी-मुरम उत्खनन के कारण खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। टावरों की नींव के आसपास बड़े पैमाने पर खुदाई किए जाने से उनकी स्थिरता प्रभावित हुई है, जिससे वर्षा और तेज हवाओं के दौरान टावर गिरने का खतरा बढ़ गया है।

प्रदेशभर में ट्रांसमिशन टावरों के आसपास अवैध उत्खनन को लेकर मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) पहले भी चिंता जता चुका है। ग्वालियर-दतिया लाइन प्रदेश के महत्वपूर्ण बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का हिस्सा है।

यदि किसी टावर को नुकसान पहुंचता है तो ग्वालियर, दतिया और आसपास के क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसमिशन टावर पूरी तरह जमीन की मजबूती पर निर्भर होते हैं। नींव के आसपास लगातार खनन होने से मिट्टी का क्षरण बढ़ता है और टावर झुकने या गिरने की आशंका पैदा हो जाती है।


प्रशासन को पत्र लिखकर कंपनी कर चुकी है कार्रवाई की मांग

एमपी ट्रांसको के अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की है। बावजूद इसके कुछ क्षेत्रों में अवैध उत्खनन जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मानसून के दौरान जमीन नरम होने और तेज हवाओं की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है।

मध्य प्रदेश भर में 89 हजार टावर

प्रदेश में करीब 89,300 ईएचवी ट्रांसमिशन टावर हैं। प्रदेश के कई जिलों में अवैध खनन से टावरों की नींव कमजोर हुई है। अगर इनमें से पांच प्रतिशत टावर भी समस्या से प्रभावित होते हैं, तो प्रदेश की विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

क्या हो सकता है नुकसान

यदि किसी 220 केवी ट्रांसमिशन टावर को क्षति पहुंचती है तो बड़े क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसके अलावा मरम्मत में लाखों रुपये का खर्च और कई घंटे या दिनों तक विद्युत व्यवस्था प्रभावित रहने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार टावरों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन बिजली व्यवस्था और जन सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा है।

  • कुल ईएचवी फीडर : 1,258
  • कुल ईएचवी टावर : 89,300
  • ट्रांसमिशन लाइनों की कुल लंबाई : 43,612 सर्किट किलोमीटर
  • खतरा : टावरों की नींव के आसपास अवैध उत्खनन से जमीन कमजोर होने पर टावर गिरने की आशंका

यह भी पढ़ें- MP News: अवैध खदानों पर अब सैटेलाइट से रखी जाएगी नजर, अधिकारी मोबाइल से करेंगे वेरिफाई

टावरों के पास अवैध उत्खनन की शिकायतें आईं हैं

220 केवी ग्वालियर-दतिया ट्रांसमिशन लाइन के टावर ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी ट्रांसमिशन टावरों के नजदीक अवैध उत्खनन की शिकायतें आई हैं। उत्खनन रोकने के लिए प्रशासन को पत्र लिखे गए हैं। - शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको