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सिंधिया संपत्ति विवाद: राजीनामे पर बुआ की बेटी ने जताई आपत्ति, कोर्ट ने कहा- सीलबंद लिफाफे में न दें रिकॉर्ड

सिंधिया राजपरिवार की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े विवाद में आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता एक बार फिर कानूनी उलझन में फंसता नजर आ रहा है।

By Varun SharmaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 08:34:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 11:21:26 PM (IST)
सिंधिया संपत्ति विवाद: राजीनामे पर बुआ की बेटी ने जताई आपत्ति, कोर्ट ने कहा- सीलबंद लिफाफे में न दें रिकॉर्ड
सिंधिया परिवार की 40 हजार करोड़ की संपत्ति का मामला

HighLights

  1. सिंधिया परिवार के 40 हजार करोड़ के संपत्ति विवाद में सुनवाई टली
  2. जिला अदालत पहुंचा मामले का 1000 से अधिक पन्नों का रिकॉर्ड
  3. जयविलास पैलेस समेत कई ऐतिहासिक धरोहरें विवाद में शामिल

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े विवाद में आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता एक बार फिर कानूनी उलझन में फंसता नजर आ रहा है। ग्वालियर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सोमवार को प्रस्तावित राजीनामे और उस पर दर्ज आपत्ति को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की ओर से जवाबी आवेदन अदालत में पेश किए गए।

त्रिपुरा राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रतिमा देवी राना ने जताई आपत्ति

यह आपत्ति ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना की ओर से दाखिल की गई है। प्रतिमा देवी का संबंध त्रिपुरा राजपरिवार से है। उन्होंने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए समझौते की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किए जाने और संपत्ति में उनके अधिकार पर विचार करने की मांग की है। सोमवार की सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी स्वयं अदालत में मौजूद नहीं थीं। उनकी बेटी शिवांगी देवी अपने पति के साथ कोर्ट पहुंचीं।


कोर्ट ने 25 अगस्त तय की अगली तारीख, सीलबंद लिफाफे पर जताई नाराजगी

तीनों प्रमुख पक्षों ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से जवाबी आवेदन अदालत में प्रस्तुत किए गए। इन आवेदनों पर प्रारंभिक सुनवाई हुई। मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से बहस के लिए अदालत ने अगली तारीख 25 अगस्त निर्धारित की है। तब प्रतिमा देवी की आपत्ति और उसके जवाब में दाखिल आवेदन पर विस्तृत तर्क रखे जाने की संभावना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि समझौते की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी और प्रतिमा देवी की ओर से उठाए गए संपत्ति अधिकार के सवाल का कानूनी समाधान किस तरीके से किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से कुछ दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। इस पर कोर्ट ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि आगे की सुनवाई में कोई भी दस्तावेज बंद लिफाफे में पेश न किया जाए। इस पर सिंधिया की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि उक्त दस्तावेज बेहद गोपनीय है, इसलिए लिफाफे में दिए हैं। न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर न्यायालय में समझौते के लिए आए हैं तो वैसा ही व्यवहार रखें। कोई दस्तावेज पेश करें तो आम व्यक्ति की तरह खुली कोर्ट में पेश करें, इस प्रकार बंद लिफाफे में नहीं।

पहले समझौते पर सहमति, अब आपत्ति क्यों?

प्रतिमा देवी की आपत्ति के जवाब में वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि जब पहले प्रस्तावित समझौते के दौरान प्रतिमा देवी ने अपनी सहमति दी थी और खुद को इस प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अब समझौते के अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है? जवाब में प्रतिमा देवी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

मामले में जवाब देने वाले पक्ष की ओर से अदालत से यह भी कहा गया है कि यदि प्रतिमा देवी की ओर से पहले सहमति देने के बाद अब जानबूझकर समझौते की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है, तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनवाई और दोनों पक्षों के तर्कों के आधार पर ही लिया जाएगा।

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