
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर के बहोड़ापुर स्थित आनंद नगर चौपाटी पर भरे बाजार बजरंग दल नेता के भाई विवेक मीणा की सिर में गोली मारकर हत्या के आरोपित बदमाश लाला अग्रवाल, राहुल यादव और सौरभ यादव 24 घंटे बाद भी पकड़े नहीं जा सके थे। आरोपितों में से एक ने वारदात के 24 घंटे पहले हजीरा क्षेत्र में गोली चलाई थी।
सूचना मिलने पर पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी और इसके बाद गुरुवार की रात उसने दो और साथियों के साथ आनंद नगर में बजरंग दल नेता के भाई की हत्या कर दी। रात को जब मृतक के स्वजन ने बहोड़ापुर थाने के बाहर लाश रखकर चक्काजाम किया था, तब पुलिस अधिकारियों ने 12 घंटे का समय मांगा था और 12 घंटे के भीतर ही अपराधियों को पकड़ने का दावा किया था। लेकिन शातिर अपराधियों ने पुलिस अफसरों के खोखले दावों पर पानी फेर दिया। इस घटना के बाद मानसिक आरोग्यशाला तिराहे पर शुक्रवार दोपहर में दोबारा स्वजन ने सड़क पर जाम लगा दिया।
अपराधियों को पकड़ने में नाकाम पुलिस ने मृतक के स्वजन और परिचितों पर लाठियां चलाई। इन्हें खदेड़ दिया। इस घटना और 24 घंटे बाद भी अपराधियों के न पकड़ने जाने के बाद पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर लोगों में आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोगों ने शहर की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया भी दी। घटना आनंद नगर चौपाटी पर हुई, लेकिन जिस तरह से अपराधियों ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया आम लोग दहशत में हैं।
विवेक मीणा के स्वजन का कहना है कि तीनों अपराधियों पर पूर्व से कई अपराध दर्ज हैं। इनका एनकाउंटर होना चाहिए। यही असली न्याय है।
विवेक मीणा की हत्या में शामिल सौरभ यादव के बारे में पता लगा है कि उसने 24 घंटे पहले हजीरा में अंशु भदौरिया निवासी पीएचई कालोनी पर गोली चलाई थी। अंशु भदौरिया हाल ही में जेल से छूटा था, उस पर भी एफआइआर दर्ज हुई थी। इसमें सौरभ फरियादी था। सौरभ द्वारा गोली चलाने की सूचना हजीरा थाना पुलिस को मिली लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकी।
पुलिस उसके भाई विकास यादव को थाने लेकर आई और कुछ देर बाद उसे छोड़ दिया। इस मामले में कोई एफआइआर भी दर्ज नहीं की गई। इस संबंध में हजीरा थाना प्रभारी जीतेंद्र तोमर से नईदुनिया ने बात की तो बोले कि सौरभ द्वारा गोली चलाए जाने की शिकायत अंशु द्वारा की गई थी। कंट्रोल रूम पर इसकी सूचना आई थी। इसके बाद फोर्स पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला।
सौरभ के भाई विकास को थाने लाकर पूछताछ की थी, लेकिन एफआइआर दर्ज कराने फरियादी ही थाने नहीं आया था। अगले दिन उसका इंतजार करते रहे, शाम को सौरभ व उसके साथियों ने हत्या ही कर डाली।
विवेक मीणा की हत्या में शामिल लाला अग्रवाल ने मुरैना के बानमोर में सुनार की हत्या की थी। इसके अलावा भी उस पर कई आपराधिक मामले पूर्व से दर्ज हैं। बहोड़ापुर थाने में ही दो केस दर्ज हैं। जेल से छूटकर उसने सौरभ और राहुल के साथ गैंग बना ली। राहुल की जमीन बिकी है, जिससे उसके पास रुपया आया है। लाला ने गैंग बना ली, पुलिस को भनक तक नहीं लगी। यह स्थिति बताती है- पुलिस की निगरानी, अपराधियों का डोजियर भरवाने का दावा व कांबिंग गश्त सिर्फ दिखावा है।
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अपराध रोकने पर पुलिस का ध्यान नहीं है। बिना नंबर की गाड़ियां, हथियारबंद बदमाश, नशेड़ी, काली फिल्म लगाकर अपराधी शहर में घूमते हैं और ऐसी वारदात कर देते हैं। पुलिस चौराहों पर सिर्फ चालान काटने में व्यस्त रहती है, चेकिंग में नहीं। - माधव अग्रवाल, बर्तन कारोबारी।
न अपराध नियंत्रित है, न ट्रैफिक मैनेजमेंट। पुलिस चौराहों पर नजर तो आती है, लेकिन सिर्फ चालान काटती हुई। अपराधी बेखौफ हैं। ऐसी घटनाएं डराती हैं। - संदीप मित्तल, सराफा कारोबारी।
यह घटना शहर में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। बजरंग दल के जिला सह मंत्री के भाई की भरे बाजार गोली मारकर हत्या की घटना निंदनीय है। अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी, तभी पुलिस का खौफ नजर आएगा। - नीरज जैन, भाजपा नेता।
अपराधियों की घेराबंदी में टीमें लगी हैं। 10-10 हजार का इनाम घोषित किया गया है। सख्त कार्रवाई करेंगे, जो नजीर बनेगी। - धर्मवीर सिंह, एसएसपी।