'गोरी खाल' वाले अंग्रेजों से पड़ा जिसका नाम... हरदा में अब वही 'गोराखाल' बना MP का खूबसूरत इको-टूरिज्म स्पॉट
झरने के पास अंग्रेजों के समय का रेस्ट हाउस आज भी मौजूद है, जबकि स्थानीय मान्यता के अनुसार 'गोराखाल' नाम अंग्रेजों ('गोरी खाल वाले') से जुड़ा है।
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 04:50:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 04:50:38 PM (IST)
रहटगांव के गोराखाल का झरना, जहां करीब 150 फीट ऊपर से इस तरह पानी गिरता दिखाई देता है। जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। नईदुनिया।HighLights
- 150 फीट ऊंचाई से बहता गोराखाल झरना
- इको टूरिज्म के रूप में विकसित स्थल
- 'गोराखाल' नाम अंग्रेजों ('गोरी खाल वाले') से जुड़ा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, हरदा/ रहटगांव । तहसील क्षेत्र के वनांचल में वर्षा के चलते कई मनमोहक दृश्य देखने को मिल रहे हैं। जंगल और गांवों में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है। लोग परिवार सहित घूमने जा रहे हैं। वर्षा के बाद नदी और नालों में भी पानी आ गया है।
तहसील मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित गोराखाल झरना इस समय लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र बना हुआ है।
150 फीट की ऊंचाई से गिरता है झरना
यह झरना लगभग 150 फीट की ऊंचाई से गिरता है। हरदा जिले में यह सबसे बड़ा झरना हैं, जो इतनी ऊंचाई से गिरता हैं। इसे देखने से के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। पूर्व विधायक संजय शाह एवं अन्य भाजपा पदाधिकारियों द्वारा झरने पर पहुंचे।
पूर्व विधायक शाह के विशेष प्रयास से इस झरने को इको पर्यटन में लिया गया था। इसके अलावा वन विभाग ने भी प्रयास किए थे।
झरने से जुड़ी अंग्रेजों की कहानी
गोराखाल में अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस भी है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि आजादी से पहले यहां अंग्रेज आते थे और शिकार करने के लिए रुकते थे। आदिवासी अंग्रेजो को गोरी खाल वाले बोलते थे उसी आधार पर बाद में इस क्षेत्र का नाम गोराखाल पड़ गया।
पर्यटन विकास बोर्ड ने संवारा
मध्य प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल द्वारा गोराखाल वाटरफॉल मनोरंजन क्षेत्र स्थल पर कार्य कराए जाने के लिए करीब 20 लाख 10 हजार रुपये स्वीकृत किए थे, जिसके तहत कई कार्य हुए।