इंदौर में कांग्रेस का महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर हमला, 72 मौतों से लेकर 600 करोड़ बकाया तक गिनाईं चार साल की नाकामियां
इंदौर में कांग्रेस ने महापौर और भाजपा परिषद के चार साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए। हादसों, वित्तीय संकट, भ्रष्टाचार, बढ़े टैक्स और बदहाल व्यवस्थाओं को ल...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 10:03:58 PM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 10:03:58 PM (IST)
इंदौर में कांग्रेस का महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर हमला। (फाइल फोटो)HighLights
- कांग्रेस ने महापौर के चार साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए।
- बेलेश्वर, भागीरथपुरा हादसों में न्याय नहीं मिलने का आरोप।
- निगम पर 600 करोड़ बकाया, वित्तीय संकट का दावा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम की भाजपा परिषद और महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपने चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रहे हैं। उसी बीच कांग्रेस ने नाकामियों को गिनाते हुए मोर्चा खोल दिया है। पहले पटेल नगर में बेलेश्वर मंदिर की बावड़ी में हुई मौतों और फिर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के लिए कांग्रेस ने माहापौर को जिम्मेदार ठहराया है।
हादसों के पीड़ितों को नहीं मिला न्याय
- गुरुवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि बेलेश्वर मंदिर बावड़ी में 36 लोग मरे थे। इसके बाद भागीरथपुरा में दूषित जल से भी 36 मौतें हुई।
- बेलेश्वर हादसों के पीड़ित परिवारों को न तो मुआवजा मिला ना दोषियों को सजा। बल्कि जिन इंजीनियरों को निलंबित किया गया था उन्हें अब अच्छी पोस्टिंग दे दी गई है। भागीरथपुरा कांड में भी आज तक जहरीले पानी का असल कारण आज तक सामने नहीं आया है।
कंगाली की कगार पर नगर निगम
शहर अध्यक्ष चौकसे और नेता प्रतिपक्ष मिमरोट ने कहा कि चार साल में शहर के विकास के मुद्दे पर भी महापौर आवाज नहीं उठा सके। प्रदेश सरकार के पास इंदौर नगर निगम की चुंगी क्षतिपूर्ति, स्टैंप ड्यूटी और प्रवेश कर के 600 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है। पैसा नहीं मिलने से इंदौर नगर निगम कंगाली के स्तर पर पहुंच चुका है। जनता पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है लेकिन सरकार व मुख्यमंत्री से महापौर इंदौर के हक का पैसा नहीं मांग पा रहे हैं।
घोटाले, टैक्स और बदहाल व्यवस्थाएं
- ड्रेनेज लाइन के घोटाले को दबाकर छोटा बताया जा रहा है। मामले में दोषियों से वसूली नहीं हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नामांतरण घोटाला हो या फर्जी फाइल घोटाला सब भार्गव के कार्यकाल में सामने आए। पूरे शहर में सड़के खोदकर छोड़ दी गई हैं।