
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लकड़ियों के अवैध परिवहन को लेकर इंदौर वनमंडल में राज्य स्तरीय उड़नदस्ते की कार्रवाई होने के बाद सख्ती बढ़ा दी। अब लकड़ी मंडियों पर नजर रखने के लिए सीसीएफ और डीएफओ उड़नदस्ते को दोबारा सक्रिय कर दिया है, लेकिन इस बार निगरानी के तरीके में बदलाव किया है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने जिले की सीमाओं पर रात में गश्त करने वाले अधिकारियों की ड्यूटी प्रतिदिन बदली जाएगी। चेकिंग चौकियों पर भी रोस्टर के अनुसार कर्मचारियों की तैनाती होगी। इसके लिए सभी रेंज से ड्यूटी चार्ट मांगा गया है। उड़नदस्ते के सदस्यों को कार्रवाई के दौरान बॉडी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, गश्त के लिए निजी वाहनों के बजाय सरकारी वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
दरअसल अगस्त में राज्य स्तरीय उड़नदस्ते ने धार रोड स्थित टिंबर मार्केट में कार्रवाई की थी। इस दौरान आरा मशीन और गोदाम सील किए गए थे। जलाराम एंटरप्राइज के गोदाम और आरा मशीन, प्रशांत टिम्बर मार्केट तथा सांवेर में लकड़ी कारोबारी सुनील परमार के कारखाने की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई थीं।
उड़नदस्ते की रिपोर्ट के आधार पर वनकर्मियों को नोटिस भी जारी किए गए। इसके बावजूद सितंबर में सांवेर क्षेत्र के गुरान स्थित एक फैक्ट्री में लकड़ियों के स्टॉक में गड़बड़ी मिली।
वनकर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप भी लगे। इसके बाद शाजापुर के एक व्यापारी ने भी शिकायत की। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अभी सांवेर और देपालपुर सबरेंज से बिना टीपी की लकड़ियां आ रही हैं। इसे लेकर वनकर्मियों की भूमिका सामने आई है।
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इन घटनाओं के बाद इंदौर वृत्त के चारों वनमंडलों में लकड़ियों के अवैध परिवहन पर नजर रखी जा रही है। सीसीएफ पीएन मिश्रा ने डीएफओ लाल सुधाकर सिंह को जरूरी निर्देश दिए हैं। वनमंडल स्तर के उड़नदस्ते की जिम्मेदारी हर दिन अलग-अलग रेंजर को सौंपी जाएगी।
वहीं, वृत्त स्तरीय उड़नदस्ते को धार और अलीराजपुर में एक सप्ताह तक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का उद्देश्य अवैध परिवहन रोकना और निगरानी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है।